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दरभंगा । अपना सब एखन लोक आस्था आ निष्ठा के महापाबनि छठि मना रहल छी। एहि पाबनिक शुरुआत त, सोमेदिन सं भ चुकल अछि। आई बुधदिन एहि महापाबनि’क तेसर दिन मनाओल जा रहल अछि। आजुक दिन सांझ के श्रद्धालु डूबैत सूर्य के अर्घ्य द सुख समृद्धि के मंगल कामना करैत छथि। आजुक संध्या डूबैत सूर्य के पहिल अ‌र्घ्य देल जेतनि। महापाबनि छठि में निर्जला व्रत राखल जाईत अछि।

महापाबनि छठि के परंपरा आ हुनकर महत्व के प्रतिपादन करैत अनेकों पौराणिक आ लोक कथा रामायण,महाभारत के अलावा पुराण सब में सेहो प्रचलित अछि।।एकरा सबहक अलावा छठि महापाबनि जरुरी अछि सांस्कृति के विरासत आ आस्था के बना के रखबाक लेल,संगहि परिवार आ समाज में एकता आ एकरूपता बना के रखबाक लेल।

संगहि ई पाबनि जरुरी अछि

अपना सबहक लेल,जे अपन जड़ि सं कटि रहल छी। घर’क ओहि समांगकेँ लेल जिनका बस घर एबाक एकटा बहाना चाही।

ओहि माँ के लेल जिनका अपन संतान के देखला महीनों-सालों भ जाइत छईन्ह।संगहि ओहि परिवार के लेल जे टुकड़ा म बैंट चुकल छथि।

ओहि आब बला पीढ़ी क लेल जिनका ईहो नहि बूझल जे दुनिया फ्लैट आ इन्टरनेट स बाहरो अछि।

खास. क हुनका लेल जे पोखरि वा धार बस किताबें में देखने छथि।

ओहि परंपरा के जीवित रखबाक लेल जे समानता के बात करैतअछि। जे बुझबैत अछि जे बिना पुरोहित के एकहि घाट पर सबहक पूजा
भ सकैत अछि।

हुनका लेल जिनकर संस्कार बस उगैत सूरज के नहि डूबैत सूरज के सेहो प्रणाम केनाई सिखबैत अछि।

मैट’क समान आ सूप,छिट्टा बनेनिहार सबहक लेल। हुनका ई बुझबाक लेल जे एखनो एहि समाज में हुनकर बहुत महत्व छईन्ह।

संगहि ई पावनि जरूरी अछि ओहि दंभी पुरुष सबहक लेल जे नारी के कमज़ोर बुझैत छथिन्ह।

ई पाबनि सिखबैत अछि जे,
संयमित आ संतुलित व्यवहार- सुखमय जीवन के आधार अछि ।

आभार🙏