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आज दिनांक- 25/02/2022 को विश्वविद्यालय हिंदी विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने हेतु ‘उत्साहवर्धन समारोह’ आयोजित किया गया। हिंदी विभाग के चार शोधार्थियों ने नेट दिसम्बर 2021 की परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। सियाराम मुखिया और सरिता कुमारी ने जहाँ जेआरएफ की योग्यता प्राप्त की,वहीं खुशबू कुमारी तथा दुर्गानंद ठाकुर ने सहायक प्राध्यापक होने की पात्रता हासिल की है। इस उपलक्ष्य में आयोजित ‘उत्साहवर्धन समारोह’ में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो०राजेन्द्र साह ने कहा कि संघर्ष से ही सफलता मिलती है। यदि सच्ची निष्ठा,लगन,तत्परता एवं समर्पण हो तो कठिन-से- कठिन लक्ष्य भी आसान हो जाते हैं| निरंतर अभ्यास से भी प्रतिभा अर्जित की जा सकती है| विपरीत परिस्थितियां भी कभी-कभी अनुकूल परिस्थिति को जन्म देती हैं|अज्ञेय के शब्दों में उन्होंने कहा कि-‘दुख सबको मांजता है।’ अपने छात्र जीवन के संघर्षों को याद करते हुए प्रो०साह ने कहा कि उन्होंने स्वयं भी बहुत संघर्ष करके जेआरएफ हासिल किया था। इस बात पर उन्होंने बहुत जोर दिया कि आज प्रतियोगिता काफी बढ़ गयी है, ऐसे में नौकरी की राह आसान नहीं है। छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि आप सभी को अभी और मेहनत की जरूरत है। अपनी वाणी को विराम देते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्यता ही साहित्य का चरम लक्ष्य है|इसलिए विकसित दृष्टिकोण के साथ अध्ययन-मनन करना बहुत आवश्यक है।
सह प्राचार्य डॉ०सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने कहा कि परीक्षाओं में सफलता-असफलता मिलती रहती है लेकिन समर्पण और अनुशासन जीवन के लिए नितांत आवश्यक है। डॉ०सुमन ने अपनी बातों को विराम देते हुए कहा कि आज जब अपने छात्र शिखर पर पहुँच कर विभाग का परचम लहरा रहे हैं तो ऐसी खुशी की अनुभूति हो रही है जैसे एक पिता को अपने पुत्र की सफलता पर होती है।
इस अवसर पर डॉ०आनन्द प्रकाश गुप्ता ने कहा कि विषम परिस्थितियों में अद्भुत कौशल और जिजीविषा का परिचय देते हुए छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा उतीर्ण करके हिंदी विभाग का नाम रौशन किया है। उन्होंने आगे कहा कि बिरौल जैसे सुदूर गाँव के अभावग्रस्त छात्रों का इस मुकाम पर पहुँचना अपने -आप में ही आश्चर्यजनक उपलब्धि है।

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ०अखिलेश कुमार ने कहा कि शिक्षक वह रास्ता है जो स्वयं वही रह कर अपने छात्रों को उसकी मंजिल तक पहुँचाता है। सही मायने में छात्र की सफलता ही एक शिक्षक की सफलता है। उन्होंने नेट/जे.आर.एफ की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को निरंतर आध्यनशील रहने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर सियाराम मुखिया, सरिता कुमारी, खुशबू कुमारी और दुर्गानन्द ठाकुर ने परीक्षा की तैयारी के दौरान आयी चुनौतियों, समस्याओं और परेशानियों को साझा किया तथा स्नातकोत्तर द्वितीय और चतुर्थ छमाही के छात्रों को वह रास्ता बताया जिसपर चल कर वे भी आगामी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकें। अपने कठिन अनुभवों को साझा करते हुए सियाराम और सरिता भावुक हो उठे।

इस अवसर पर शोधप्रज्ञ अभिषेक कुमार सिन्हा, धर्मेन्द्र दास, समीर कुमार, मंजू सोरेन, शिखा सिन्हा, सुशील मंडल ने भी सभा को सम्बोधित किया। मंच का संचालन वरीय शोधप्रज्ञ कृष्णा अनुराग ने किया।