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भारतीय संस्कृति के पुनरुद्धारक स्वामी विवेकानंद – प्रधानाचार्य दिलीप कुमार

युवाओं में सांस्कृतिक चेतना के जनक हैं स्वामी विवेकानंद- डा विकास सिंह

#MNN@24X7 दरभंगा, मारवाड़ी महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा 12 जनवरी 2024 को स्वामी विवेकानंद की जयंती पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य डा दिलीप कुमार ने स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर माल्यार्पण किया और शिक्षक एवं छात्र – छात्राओं ने पुष्पार्पण किए।

प्रधानाचार्य ने बताया कि स्वामी जी मानते थे कि प्रेम ही जीवन का एकमात्र नियम है, स्वार्थ की बजाय प्रेम को जीवन में आश्रय दें। जीवन को सुंदरता से भरपूर मानें और विश्वास रखें कि इसमें अर्थ छुपा हुआ है। अपनी भावनाओं को महसूस करें और उन्हें सकारात्मक दिशा में दिखाएं। अपनी आत्मा को मुक्त करने के लिए भगवान् को हर मानव में महसूस करें।

संस्कृत विभागाध्यक्ष डा विकास सिंह ने स्वामी जी के सिद्धांतों के आधार पर कहा कि एक सफल और संतुलित जीवन जीने के लिए हमें निंदा और दोष में नहीं पड़ना चाहिए। हमें धन को सही दिशा में उपयोग करना चाहिए और दूसरों की सहायता करके भलाई के कार्यों में शामिल होना चाहिए। हिंदी विभागाध्यक्ष डा अनुरुद्ध सिंह ने कहा कि स्वामी जी कहा करते थे कि अलग-अलग दृष्टिकोण से दुनिया को देखना और सभी मतभेदों को समझने का प्रयास करना हमें सामंजस्यपूर्ण बनाता है।

कार्यक्रम का संयोजन एवं सफल संचालन एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डा सुनीता कुमारी ने करते हुए कहा कि स्वामी जी मानते थे कि हमें अपनी आत्मा की सुननी चाहिए और उससे आध्यात्मिक दृष्टिकोण भी प्राप्त करना चाहिए। हमें किसी भी कार्य को असंभव नहीं मानना चाहिए और अपनी शक्तियों को सही रूप से उपयोग करना चाहिए।

महाविद्यालय के बर्सर डा अवधेश प्रसाद यादव ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि स्वामी जी सदैव अपने अंदर की शक्तियों को पहचानने पर बल दिया था। सत्य में बने रहना और उसे बनाए रखने के लिए बलिदान करना आवश्यक है।

कार्यक्रम में डा कुमारी कविता, डा अनुरुद्ध सिंह, डा अमित कुमार सिंह, डा गजेन्द्र भारद्वाज, डा अरविंद झा, गंगेश कुमार झा, डा नीरज कुमार तिवारी, अनिता सिन्हा, डा रवि कुमार राम, डा संजय आदि शिक्षक, डा अमरेंद्र झा, विजय कुमार, कमलेश चौधरी एवं शिवम, शिल्पी, अनीश कुमार, प्रमोद, लक्ष्य ठाकुर, आशीष, विवेक, नीलेश, दिव्यांश, शिल्पी, अनुकृति, सीमा, संगम, सानिया, समरेश, अनिल, फैजल, खुशबू, दामिनी आदि एनएसएस के लगभग 30 छात्र – छात्राएं उपस्थित थे।