●शतरंज के खेल में माहिर लोग जीवन में बाजीगर होते हैं:- उप क्रीड़ा पदाधिकारी, प्रो० अमृत कुमार झा।

●आपके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से ही होती है विश्वविद्यालय गौरवान्वित:- प्रधानाचार्य, प्रो० शंभु कुमार यादव।

#MNN@24X7 लनामिवि दरभंगा:- आज दिनांक 23 नवंबर 2022 को स्थानीय महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह मेमोरियल महाविद्यालय, दरभंगा के सभागार में दो दिवसीय अंतर महाविद्यालय शतरंज प्रतियोगिता 2022-2023 का उद्घाटन प्रधानाचार्य प्रो० शंभु कुमार यादव की अध्यक्षता में किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय के क्रीड़ा व उप क्रीड़ा पदाधिकारी ने शतरंज प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। इस प्रतियोगिता में विभिन्न महाविद्यालयों के 52 छात्र व 22 छात्राएं समेत कुल 74 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रधानाचार्य प्रो० शंभु कुमार यादव ने कहा कि इस बार महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह मेमोरियल महाविद्यालय, दरभंगा में अंतर महाविद्यालय शतरंज प्रतियोगिता का आज शुभारंभ होने जा रहा है। हम इस बार शतरंज प्रतियोगिता की मेजबानी कर रहे हैं। यह हमसबों के लिये हर्ष की बात है। हमने अपनी ओर से अंतर महाविद्यालय शतरंज प्रतियोगिता को भव्यता देने की पुरजोर कोशिश की है और खिलाड़ियों को हर संभव सुविधाएं देने के लिये प्रतिबद्ध हैं। हम खेल में भाग ले रहे तमाम महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं सह खिलाड़ियों को अपनी ओर से शुभकामनाएं देते हैं। आप अच्छी तरह से खेलें। आनेवाला कल आपसबों का है। आप में से ही बेहतरीन प्रदर्शन करनेवालों में से ही विश्वविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ टीम चुनी जाएगी। आप जब बढ़िया प्रदर्शन करते हैं तो केवल आप गौरवान्वित होते हैं बल्कि महाविद्यालय के साथ-साथ पूरा विश्वविद्यालय परिवार गौरवान्वित होता है।

बतौर मुख्य अतिथि मिथिला विश्वविद्यालय के क्रीड़ा पदाधिकारी प्रो० अजय नाथ झा ने कहा कि क्रीड़ा पदाधिकारी के रूप में एक शिक्षक के साथ-साथ खिलाड़ी होने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आप खिलाड़ी के भावनाओं व संवेदनाओं से जुड़ जाते हैं। उसके साथ होनेवाले सारे परेशानियों से भलीभांति अवगत होते हैं और उसे स्वतः दूर करने का प्रयास करते हैं। क्रीड़ा पदाधिकारी के रूप में हम सदैव अपना सर्वश्रेष्ठ देने की आज भी कोशिश करते हैं। आज तमाम अभावग्रस्त संसाधनों के बावजूद विश्वविद्यालय खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है। जिसका परिणाम है कि हमारे विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों का मनोबल सदैव उच्च रहता है और सदैव वो राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करते आये हैं। हम तमाम खिलाड़ियों से इस बार भी यह उम्मीद रखते हैं कि वे अपने उत्कृष्ट कौशल व खेल भावना का परिचय देंगे। हम समय दर समय उन्हें प्रेरित करते रहते हैं। मनोवैज्ञानिक रूप से उनका काउंसिलिंग करने के लिये आज हमारे पास ख्यातिप्राप्त मनोवैज्ञानिक के रूप में उप-खेल पदाधिकारी प्रो० अमृत कुमार झा का साथ मिल रहा है। आप लोग अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें, उसी में से हमलोग अंतर विश्वविद्यालय व राष्ट्रीय स्तर के लिये टीम चुनेंगे। आपलोगों पर हमें गर्व है। आप तमाम खिलाड़ियों को मैं मिथिला विश्वविद्यालय की ओर से शुभकामनाएं देता हूँ। आपलोग अच्छी तरह से ध्यानपूर्वक खेलें और अपने-अपने महाविद्यालय का नाम रौशन करें।

बतौर विशिष्ट अतिथि मिथिला विश्वविद्यालय के उप क्रीड़ा पदाधिकारी प्रो० अमृत कुमार झा ने कहा कि शतरंज के खेल का मनोविज्ञान से गहरा नाता है और एक उप क्रीड़ा पदाधिकारी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक होने के नाते मैं आप सबों को बताना चाहता हूं कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी खेल का आयोजन महाविद्यालयों में नई ऊर्जा का संचार करती है। आप लोग दवाबमुक्त होकर खेले। विश्वविद्यालय परिवार आपके साथ हर कदम पर खड़ा है। आज खेल में अपार संभावनाएं हैं। शतरंज का खेल आपके कार्य करने के तरीकों में निखार लेता है। शतरंज के खेल में माहिर लोग जीवन में बाजीगर होते हैं। आज के तारीख में वही लोग सफल हैं जो एक साथ मल्टीपल कार्य करने का दक्षता रखते हैं क्योंकि अब जमाना टैलेंटेड लोगों का नहीं बल्कि मल्टी टैलेंटेड लोगों का है। आप अगर मल्टी टैलेंटेड हैं तो यकीन मानिये यह युग आपका ही है। आप सभी को मैं प्रोत्साहित करने आया हूँ। आप में से ही सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करनेवालों की टीम चुनी जायेगी जो अंतर विश्वविद्यालय व राष्ट्रीय फलक पर अपना जलवा बिखेरेगी। ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है। आप सब पूरे मन से खेलें और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। मिथिला विश्वविद्यालय आपके सर्वांगीण विकास के लिये प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर चयनकर्ता रंजीत कुमार झा व साकेत चौधरी, तकनीकी विशेषज्ञ मनीष राज, आयोजन समिति के सदस्य डॉ० ज्वाला चंद्र चौधरी समेत विभिन्न महाविद्यालयों के टोली प्रबंधक और महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मी उपस्थित थे। स्वागत भाषण महाविद्यालय के खेल पदाधिकारी सह आयोजन सचिव डॉ० विजय शंकर झा ने जबकि मंच संचालन व धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ० सतीश कुमार सिंह ने किया।