‘मौलाना आजाद विजनस एंड इंडियन इथिकल डायवर्सिटी’ विषयक संगोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने रखे महत्वपूर्ण विचार।
विश्वविद्यालय उर्दू विभागाध्यक्ष ने सफल आयोजन हेतु कुलपति, कुलसचिव सहित सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
#MNN@24X7 स्नातकोत्तर उर्दू विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के अधीन संचालित मौलाना अबुल कलाम आजाद चेयर के तत्त्वावधान में “मौलाना आजाद विजनस एंड इंडियन इथिकल डायवर्सिटी” विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के अंतिम दिन देश के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने अपने विचार रखते हुए मौलाना अबुल कलाम आजाद के विचारों को साझा किया तथा उनके दर्शन की प्रासंगिकता पर बल दिया।
विश्वविद्यालय उर्दू विभागाध्यक्ष सह मौलाना अबुल कलाम आजाद चेयर के निदेशक प्रो आफताब अशरफ ने अतिथियों का स्वागत करते हुए इस वृहद एवं सफल आयोजन के लिए कुलपति प्रोफेसर एस पी सिंह, कुलसचिव प्रोफेसर मुश्ताक अहमद सहित संगोष्ठी में शामिल सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि भविष्य में उर्दू विभाग तथा आजाद चेयर के द्वारा इस तरह के और भी शैक्षणिक व सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आज की संगोष्ठी की अध्यक्षता संयुक्त रूप से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के उर्दू- प्राध्यापक प्रोफ़ेसर मो आफताब आफाकी तथा जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के उर्दू विभाग के प्रोफेसर ख्वाजा मो इकरामुद्दीन ने किया।
वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली के उर्दू- प्राध्यापक प्रो मो अजीम, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रोफ़ेसर मो नदीम अहमद आदि ने अपने महत्वपूर्ण विचारों से प्रतिभागियों को लाभान्वित किया। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मो अली जौहर ने कौमी एकजहती के हवाले से बातचीत करते हुए कहा कि मौलाना आजाद देश का संपूर्ण विकास चाहते थे और उसके लिए उन्होंने सार्थक प्रयास किया था।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में अध्यक्ष द्वय ने कहा कि आज के मौजूदा हालात में मौलाना आजाद के विचारों की प्रासंगिकता अत्यधिक बढ़ गई है। प्रो नदीम अहमद ने कहा कि अब्दुल कलाम आजाद चाहते थे कि मुस्लिम समाज कठोर अनुशासन और कड़ी मेहनत को अपनाकर देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना सुनिश्चित करें और राष्ट्रप्रेम के उद्देश्य को पूरा करे। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मो काजिम ने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद हमेशा समाज और देश के संपूर्ण विकास के लिए हर प्रकार की शिक्षा को हासिल करना आवश्यक बताया था।
सी एम कॉलेज, दरभंगा के उर्दू विभागाध्यक्ष डा अब्दुल हई ने अपने वक्तव्य में मौलाना आजाद के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए योगदानों के ऊपर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका सबसे बड़ा योगदान हिन्दू- मुस्लिम एकता के लिए अथक प्रयास है। मिल्लत कॉलेज के फारसी के प्राध्यापक डा अब्दुस समद जिलानी ने फारसी कविता की रोशनी में मौलाना आजाद के राष्ट्रीय एकता के नजरिए पर विस्तृत रोशनी डाली।
सेमिनार के तकनीकी सत्रों में दिल्ली विश्वविद्यालय के डा इम्तियाज अहमद, डा शाहिद अख्तर, डा अब्दुल राफे, डा अब्दुल मतीन, डा अब्दुल वाहिद, डा खान मो रिजवान, डा अहमद अली जौहर, डा मोतिउर रहमान, डा मो मुजाहिद हुसैन, जनाब जिया उलहक, डा वसी अहमद शमशाद, डा मो मुनोवर आलम, जेबा परवीन, डा नफासत कमाली, डा सादिक इकबाल, फरहा मोइद, डा अब्दुस सलीम गिलानी, सैयद मो जैनुल हक समशी, डा मसरूर अहमद हैदरी, डा सऊद आलम, डा मो रिजवान हसन, उमर फारूक कासमी, ऐइसा सिद्दीका नाजिया, मो सादिक, नाजिर अनवर, आमिर उस्मानी आदि ने पत्र वाचन किया।
वहीं डा गुलाम सरवर, सुहेल, मणिकांत, राहुल तथा भारद्वाज आदि ने सेमिनार में सक्रिय सहयोग किया।