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#MNN24X7 मिथिला/दरभंगा, प्रतिनिधि। क्षेत्र में निजी स्कूलों द्वारा किताबों, ड्रेस और अन्य शैक्षणिक सामग्री के नाम पर अभिभावकों से भारी रकम वसूले जाने को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों में पढ़ाई से अधिक जोर किताब, कॉपी, यूनिफॉर्म, जूते और अन्य सामग्री की बिक्री पर दिया जा रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में उपलब्ध कराई जाने वाली किताबें सामान्य कागज से ही छपती हैं, फिर भी उनकी कीमतें अत्यधिक रखी जाती हैं। उनका आरोप है कि इन वस्तुओं में 50 से 60 प्रतिशत तक कमीशन जोड़ा जाता है, जिसका सीधा असर अभिभावकों की जेब पर पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं में एनसीईआरटी की पुस्तकों को आधार माना जाता है, तो निजी स्कूलों में इन्हें अनिवार्य क्यों नहीं किया जाता। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था कमजोर होने के कारण अभिभावक मजबूरी में निजी स्कूलों का रुख करते हैं और इस “शैक्षणिक बाजारवाद” का शिकार बनते हैं।

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों की इस मनमानी पर प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि निजी स्कूलों की शुल्क एवं सामग्री बिक्री प्रणाली पर सख्त निगरानी रखी जाए और शिक्षा को व्यापार बनने से रोका जाए।

इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी। वहीं, अभिभावक उम्मीद जता रहे हैं कि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि उन्हें राहत मिल सके।