किसान फसलों के प्रभेद के चयन में बरते सावधानी: डॉ अंजनी

#MNN@24X7 भारत सरकार के कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान पटना के निदेशक डॉ अंजनी कुमार ने कृषि विज्ञान केंद्र विद्यालय में संचालित विभिन्न परियोजनाओं एवं गतिविधियों का निरीक्षण किया।

डॉ अंजनी कुमार ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं भारत सरकार एवं राज्य सरकार की कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं दरभंगा जिले के किसानों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से संचालित की जा रही है आज किसान बंधु जलवायु परिवर्तन के चुनौतियों का सामना कर रहे हैं विशेष तौर पर बाढ़ प्रभावित मिथिलांचल क्षेत्र में रवि मौसम के फसलों का विशेष महत्व है ऐसे में किसानों के लिए यह आवश्यक है कि वे जलवायु अनुकूल खेती पद्धतियों का प्रयोग करें साथ ही विभिन्न फसलों के प्रभेदों के चयन में बुवाई की समय, अपने मृदा का प्रकार एवं क्षेत्र में लगने वाले फसल विषेश के रोग व्याधि को ध्यान में रखकर प्रभेदों का चयन करें सिर्फ अनुशंसित प्रभेदों के चयन के द्वारा किसान अपनी उत्पादकता को 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं

प्राकृतिक खेती का महत्व काफी बढ़ गया है अतः किसान यथासंभव अधिक से अधिक क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती विधियों का अनुकरण करें जिससे कि हम अपने उत्पादन लागत के कम करते हुए भूमि के स्वास्थ्य सुधार के साथ-साथ गुणवत्ता युक्त उत्पाद प्राप्त कर सके

अटारी पटना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ मनोबुलाह ने बताया की जलवायु परिवर्तन के कारण विभिन्न फसलों में नए-नए कीट एवं रोगों का प्रकोप देखा जा रहा है जिसे हम फसल विविधीकरण के द्वारा काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उन्नत तकनीक को अपनाने की आवश्यकता है जिससे कि वह सीमित क्षेत्र में अधिक उत्पादन के साथ-साथ अधिक आय प्राप्त कर सकें।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए डॉ दिव्यांशु शेखर ने बताया कि पदाधिकारीयों ने कृषि विज्ञान केंद्र में संचालित की जा रही विभिन्न परियोजनाओं के प्रगति का जानकारी प्राप्त किया तथा कृषि विज्ञान केंद्र में लगाए गए विभिन्न प्रत्यक्षण इकाइयों, बीज उत्पादन, एवं आधारभूत संरचनाओं का निरीक्षण किया तथा कई महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के सभी वैज्ञानिक और कर्मी मौजूद थे।