#MNN24X7 दरभंगा – 14 मार्च ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी व यूजीसी रेगुलेशन समता आंदोलन, दरभंगा चैप्टर द्वारा आयोजित समता महाजुटान और मार्च के समर्थन में आज सीएम लॉ कॉलेज, दरभंगा में समता कन्वेंशन का आयोजन किया गया। कन्वेंशन में पूर्व विधायक, मनोज मंजिल, आइसा राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार के अलावा यूजीसी रेगुलेशन के समर्थन में और जेएनयू वीसी की जातिवादी बयान के खिलाफ जेएनयू में चल रहे आंदोलन का नेतृत्व करते हुए जेल भेजे गए 14 जेएनयू छात्र- छात्राओं में शामिल नेहा, (अध्यक्ष आइसा) नीतीश कुमार ( पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष) मणिकांत पटेल, जेएनयू छात्र भी शामिल हुए। कन्वेंशन का संचालन RYA राज्य उपाध्यक्ष संदीप चौधरी और नागमणि ने किया।*

कन्वेंशन को संबोधित करते हुए मनोज मंजिल ने कहा कि भारतीय सामंती समाज व्यवस्था में वर्ण-जाति के आधार पर विशेषाधिकार व भेद-भाव की संस्कृति, विचार, व्यवहार, शोषण, अत्याचार एक वास्तविक सच्चाई है और यह यूजीसी रेगुलेशन 2026 का विरोध करने वाले लोगों ने अपने वर्चस्ववादी, जातिवादी मानसिकता से साबित भी कर दिया है। देश और कैंपस मनुवाद से नहीं बाबा साहब के संविधान से चलेगा। इस दौर में दलितों पिछड़ों को सूटेबल नहीं बोल कर NFS ( नॉट फाउंड सूटेबल) के तहत प्रोफेसर बनने से वंचित कर दिया जाता है। जबकि वंचितों के सूटेबल शिक्षा नीति नहीं बनाई जा रही है। प्राइवेट यूनिवर्सिटी और जूडिशियरी में आरक्षण नहीं होने की वजह से वंचित को मौका नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन की तरह बिहार में 65 प्रतिशत आरक्षण विधानसभा से पास हो कर लागू किया गया था लेकिन कोर्ट के जरिए मनुवादी ताकतों द्वारा रोक लगवा दिया गया था। बिहार की जनता इसको अब बर्दास्त नहीं करेगी।

आइसा राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा ने कहा कि आंकड़े के मद्देनजर आज भी समाज और व्यवस्था में मनुवादी वर्ण -जाति की श्रेष्ठता व वर्चस्व कायम है। इसको खत्म करने और बराबरी और सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार के लिए यूजीसी रेगुलेशन लाया गया था। लेकिन सरकार की मिलीभगत से कोर्ट द्वारा रोक लगा दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने 18 मार्च को पटना में आयोजित समता महाजुटान और राजभवन मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील छात्रों से की।

आइसा राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि समाज में व्याप्त गैरबराबरी की वजह से दलित, पिछड़े, वंचित, शोषित वर्ग के साथ जातिगत भेद-भाव, शोषण-उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं.यूजीसी के मुताबिक ही इस तरह की घटनाओं में 118% की वृद्धि हुई है। रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे सैंकड़ों दलित, पिछड़े, आदिवासी छात्रों की उत्पीड़न के कारण सांस्थानिक हत्याएं हुई है। शैक्षणिक जगत में इस तरह के भेद-भाव , जुल्म, ज्यादती पर एकदम से रोक लगनी चाहिए। इस लिए यूजीसी रेगुलेशन को और सशक्त करते हुए लागू किया जाना चाहिए।

जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कहा कि यूजीसी के पक्ष में जेएनयू छात्र संघ खड़ा न हो इसके लिए ऐसे समय पर छात्र संघ को निलंबित किया गया है। वीसी की जातिवादी बयान के खिलाफ आंदोलन में शामिल हम 14 छात्रों को जेल भेज दिया गया। लेकिन फिर भी ये आंदोलन आगे बढ़ रहा है और जब तक यूजीसी रेगुलेशन लागू नहीं होता और वस्तृत रोहित एक्ट को संसद से कानून बनाकर लागू नहीं किया जाता है तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

RYA राज्य उपाध्यक्ष संदीप चौधरी ने 18 मार्च को 74 आंदोलन (संपूर्ण क्रांति दिवस) के ऐतिहासिक दिन को पटना में समता महाजुटान और राजभवन मार्च होने जा रहा है। बिहार भर के दलित–पिछड़ों से समता, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय स्थापित करने के संघर्ष से वास्ता रखने वाले आवाम भारी तादाद में समता महाजुटान में शामिल होने का आह्वान किया।

जिले भर में सघन जनसंपर्क चलाने के साथ पर्चा वितरण, नुक्कड़ सभा करते हुए 18 मार्च को पटना में हजारों की संख्या में छात्र नौजवान जुटेंगे।

कन्वेंशन में आए छात्र युवा बुद्धजीवी और न्याय पसंद नागरिकों का सफल कन्वेंशन के लिए केशरी कुमार यादव ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

कन्वेंशन में जेएनयू छात्र मणिकांत पटेल, जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य प्रोफेसर सुरेन्द्र सुमन, केसरी कुमार यादव, नागरिक मंच के संयोजक दिनेश साफी, 1974 आंदोलन के नेता उमेश राय,नंदन सिंह,आरवाईए जिला अध्यक्ष ओणम सिंह,जिला सचिव अमित पासवान,इंद्रजीत कुमार विक्की,रंजीत राम,अमरजीत पासवान,कमरे आलम,सबा प्रवीण,मेघा कुमारी,सुजीत कुमार,नंदन सिंह,मयंक कुमार यादव,जयनारायण यादव,राहुल पासवान,विद्यानंद भारती,विनोद भारती,प्रिंस कर्ण,सिद्धार्थ राज,भीम आर्मी के डॉ.राजेश राम,प्रदीप कुमार पासवान,शशिकांत सदाय,अमित कुमार, दीपक पासवान,अरविंद राम आदि युवा उपस्थित रहे।