रांची में वंचित बच्चों के बीच सरस्वती पूजनोत्सव, शिक्षा से संवर रहा कल
#MNN24X7 रांची। गरीबी, अभाव और संघर्षों की छाया में पला-बढ़ा बचपन जब उम्मीदों की लौ बुझाने लगे, तब शिक्षा ही वह दीपक बनती है जो अंधकार को चीरकर भविष्य का रास्ता दिखाती है। रांची के हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित बाल दीप फाउंडेशन इसी विश्वास का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।
फाउंडेशन अपने नाम के अनुरूप उन बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी जला रहा है, जिनके लिए स्कूल जाना कभी सपना हुआ करता था। कई बच्चे अनाथ हैं, तो कई ऐसे परिवारों से आते हैं जहाँ माता-पिता अपने लिए भी दो जून की रोटी जुटाने में असमर्थ हैं। ऐसे हालात में बच्चों की पढ़ाई अक्सर सबसे पहले छूट जाती है।
इन परिस्थितियों को बदलने का संकल्प लिया है भारतीय सेना से सेवानिवृत्त ललन कुमार ने। बीते नौ वर्षों से वे अपने निजी संसाधनों और अपने आवास
एच.आई.-67, हरमू हाउसिंग कॉलोनी, रांची
में निःस्वार्थ भाव से वंचित बच्चों को शिक्षा, संस्कार और जीवन-दिशा प्रदान कर रहे हैं।
यह पहल केवल किताबों तक सीमित नहीं है—
यह जीवन निर्माण है,
यह चरित्र निर्माण है,
और यह भविष्य निर्माण है।
सरस्वती पूजनोत्सव में दिखी शिक्षा की सच्ची तस्वीर
बाल दीप फाउंडेशन परिसर में बच्चों के बीच सरस्वती पूजनोत्सव का आयोजन श्रद्धा, उल्लास और धूमधाम से किया गया। माँ सरस्वती की आराधना के साथ बच्चों के चेहरों पर जो आत्मविश्वास, आशा और खुशी झलकी, वही इस प्रयास की सबसे बड़ी सफलता बनी।
पूजन, भजन और सांस्कृतिक गतिविधियों के बीच बच्चों ने पढ़ाई के प्रति अपने संकल्प को दोहराया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि सीमित संसाधन कभी भी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते—बस सही मार्गदर्शन और सच्ची नीयत चाहिए।
समाज के लिए प्रेरणा
बाल दीप फाउंडेशन आज केवल एक शिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा है—कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो एक व्यक्ति भी सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवार सकता है। शिक्षा के इस दीपक से रोशन होते चेहरे इस बात की गवाही हैं कि सही हाथों में दिया गया ज्ञान, आने वाले कल को उजला बना सकता है।
