#MNN24X7 दरभंगा, 20वीं सदी के 5वे दशक के अंत में सन् 1949 में तत्कालीन मिथिला नरेश महाराजाधीराज डॉ सर कामेश्वर सिंह द्वारा स्थापित ऐतिहासिक संस्था कामेश्वर धार्मिक न्यास (के० आर० टी०) की बागड़ोर आज दिनांक 26 जनवरी 2026 को 77वे गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर युवराज कुमार राजेश्वर सिंह एवं युवराज कुमार कपिलेश्वर सिंह ने अपने हाथों में ली।

मिथिला की धार्मिक,आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को नित नवीन आयाम प्रदान किए जाने के उद्देश्य से महाराजाधीराज डॉ सर कामेश्वर सिंह द्वारा स्थापित इस कामेश्वर धार्मिक न्यास (के० आर० टी०) के अधीन 108 मंदिर है जिनमे कुछ मंदिर वर्तमान पाकिस्तान के लाहौर में एवं बांग्लादेश के ढाका में अवस्थित है। दरभंगा राज परिवार के उत्तराधिकारी युवराज द्वाय ने विधिवत ट्रस्टी का पद भार ग्रहण करने से पूर्व माधवेश्वर परिसर स्थित रमेश्वरी श्यामा, लक्ष्मीश्वरी तारा, अन्नपूर्णा, रूद्रेश्वरी काली, कामेश्वरी श्यामा, माधवेश्वर महादेव के चरणों में शीश नवा कर अपने दादी महारानी अधिरानी कामसुंदरी साहिबा की समाधि पर जाकर उस पुण्या आत्मा को नमन किया।

उसके पश्चात रामबाग परिसर में अवस्थित अपनी कुलदेवी कंकाली के मंदिर में जाकर उन्हें प्रणाम कर अपने गोसाउन/घर जाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर न्यास के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में एक अभूतपूर्व उत्सव का माहौल देखा वही रामबाग स्थित उसने आवासीय परिसर में भी उत्सवीं माहौल रहा। मीडिया से बात हुए दोनों युवराज कुमारों ने कहा की राज दरभंगा द्वारा स्थापित मंदिरों तथा धार्मिक संपत्तियों का समुचित संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी साथ ही उन्होंने जोड़ देकर कहा की न्यास के अंतर्गत सभी मंदिरों की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व पारदर्शी बनाए जाने की दिशा में ठोस सकारात्मक कदम शीघ्र उठाएं जाएंगे।
आगे उन्होंने बताया की जिस प्रकार हमारे द्वारा माधवेश्वर परिसर स्थित लक्ष्मीश्वरी तारा मंदिर का जिन्धोद्धार किया गया है, उसी प्रकार अन्य मंदिरों का जिन्धोद्धार एवं निर्माण कराया जाएगा। साथ ही धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन के मानचित्र पर दरभंगा राज के स्थलों को विकसित किया जाएगा। अभिलेखीय तथा पुरातात्विक दृष्टि से इन मंदिरों का संरक्षण हमारी पहली प्राथमिकता होगी। न्यास की संपत्तियों का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा तय की जाएगी। ताकि भविष्य में किसी प्रकार के जमीनी विवाद अथवा अतिक्रमण को रोका जा सके। अंत में उन्होंने मिथिला की लुप्त हो रही कतिपय पूजा पद्धतियों तथा धार्मिक कर्मकांडो को पूर्णजीवित किया जाएगा ताकी समकालिक व भावी पीढ़ियां इनसे पूरी तरह अवगत हो सके।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ हेमपति झा, राज दरभंगा के प्रबंधक सह सचिव आशुतोष दत्ता, शिवनाथ झा, भाजपा वरिष्ठ नेत्री मीना झा, मंजेश चौधरी, आशीष झा, ठाकुर भूपेंद्र, सुधांशु झा, संतोष सिंह, राजीव प्रकाश मधुकर, प्रियांशु झा,डॉ गोपाल जी ठाकुर , सुनील राय, राजू मंडल, प्रदीप गुप्ता, साईं निरुपम, सुभाष यादव, सत्यम कुमार, बबलू, विजय चौधरी, इसनाथ झा, सुभाष यादव, मनोज साह, रंजन शर्मा, कन्हैया दुबे, विजय झा, आयुष वैभव, जितेंद्र ठाकुर, राम कृष्ण लाल दास, मुकेश, प्रभाकर, दीपक, आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
