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दरभंगा। चंद्रधारी संग्रहालय,दरभंगा के अध्यक्ष डा शिव कुमार मिश्र के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस वर्ष1977 से 18 मई को प्रतिवर्ष मनाया जा रहा है ।

सरकार के द्वारा इस वर्ष राज्य के संग्रहालयों में अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय सप्ताह( 16-20मई)आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।चंद्रधारी संग्रहालय ,दरभंगा में मिथिला की विभिन्न संग्रहालयों के विषय में जानकारी के लिए एक चित्रप्रदर्शनी लगाई गई है।राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी एवं उनकी धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी के द्वारा 1917 में निर्मित भितिहरवा आश्रम के स्मारक भवन के अलावा उनके द्वारा उपयोग में लायी गयी चक्की के चित्रों को प्रदर्शित की गई है।फूस की कुटिया अंग्रेजों द्वारा जला देने के बाद ईट एवं खपरैल की कुटिया बनाया गया था।

जिसके लिए कस्तूरबा गांधी द्वारा सिर पर ईट एवं खपरैल ढोया गया था।इसके साथ ही वैशाली संग्रहालय के बुद्ध भगवान के अलावा टेराकोटा लैट्रिन पैन के चित्रों को देखा जा सकता है।यह लैट्रिन पैन देश का सबसे पुराना है तथा वैशाली के कोल्हुआ के स्तूप के उत्खनन के दौरान मिला था।यह इस बात का प्रमाण है कि मिथिला मे दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के पहले से ही शौचालय का निर्माण किया जाता था।

रामचंद्र शाही संग्रहालय, मुजफ्फरपुर के बुद्ध,चेचर संग्रहालय के ब्रह्मा, बेगूसराय संग्रहालय के बुद्ध,के पी जयसवाल संग्रहालय, बेगूसराय के बुद्ध,बाबा कारु खिरहर संग्रहालय, सहरसा के बुद्ध एवं तारा के चित्रों को भी प्रदर्शित की गई है। इनके अलावा अंधराठाढ़ी एवं मंगरौनी की तारा,जरैल के बुद्ध,गिरिजास्थान के भग्न बौद्ध स्तूप ,पस्टन नवटोली के बौद्ध स्तूप, हाटी के अवलोकितेश्वर, जरहटिया ,विदेश्वरस्थान एवं चेचरके बुद्ध के चित्र प्रदर्शित हैं।महिसी,सहरसा की उग्रतारा तथा महानिर्वाणमुद्रा में बुद्ध, बिहरा के मारविजय बुद्ध आदि अनेक दुर्लभ मूर्तियों को भी प्रदर्शित की गई है।
डा मिश्र ने बताया कि इस प्रदर्शनी से लोगो को अपनी संस्कृति एवं मिथिला की धार्मिक समन्वय की परम्परा के विषय में विस्तार से जानकारी मिल सकती है।ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उदय नारायण तिवारी के नेतृत्व में विशेषज्ञों के दल द्वारा प्रदर्शनी का अवलोकन करने के उपरांत बताया गया कि इस प्रदर्शनी से मिथिला के इतिहास लेखन मे बहुत सहायता मिलेगी।टीम मे डा अवनींद्र कुमार झा,डा सुशांत कुमार, मुरारी कुमार झा, राजा अम्बेडकर, पूर्णिमा कुमारी, रश्मि कुमारी के अतिरिक्त अन्य कई रिसर्च स्कालर शामिल थे।दीर्घा सहायक चंद्र प्रकाश एवं बीजेन्द्र मिश्र द्वारा आगन्तुकों को सहयोग किया गया।