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#MNN@24X7 दरभंगा, कृषि विज्ञान केंद्र, जाले, दरभंगा में 26 अगस्त 2023 को जिले के सभी प्रखंडों के प्रसार कार्यकर्ताओं “कृषि तकनीकी प्रबंधक” के लिए “खरीफ फसलों के प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खरीफ फसलों में आने वाली विभिन्न प्रकार की समस्याएं जैसे खरपतवार नियंत्रण, कीट व रोगों की समस्या खरीफ फसलों में यंत्रों के उपयोग आदि विषयों के बारे में कृषि तकनीकी प्रबंधकों को जानकारी मुहैया कराना था। ताकि किसानों को होने वाली समस्याओं का समुचित निदान किया जा सके। कार्यक्रम में केंद्र के विशेषज्ञ डॉ गौतम कुणाल, पूजा कुमारी, डॉ अंजलि सुधाकर, डॉ जगपाल, प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ चंदन कुमार, विभिन्न प्रखंडों के सहायक तकनीकी प्रबंधकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए केंद्र के पौध संरक्षण विशेषज्ञ डॉ गौतम कुणाल ने बताया की हमें अपने आप को नूतन तकनीकों अथवा शोधों से अवगत रहना होगा तभी हम किसानों के समस्याओं का ससमय उचित उपचार कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि नित्य दिन कृषि में नए नए शोध और तकनीकों का विकास हो रहा है, अगर हम उन शोध कार्यों को अपने आप में समाहित ना कर पाए तो नए-नए कीट एवं रोग के पुनरुत्थान को नहीं रोक पाएंगे। उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि पद्धति में भी बदलाव आ रहा है। इस बदलाव के अनुरूप कीट व रोग के संक्रमण में भी बदलाव आ रहा है। उनकी बदलती दशा को अगर हम अच्छे से नहीं समझ पाए तो उनके नियंत्रण में कठिनाई आ सकती है। अतः हमें अपने आप को नूतन जानकारी से अंगीभूत होना पड़ेगा। तभी हम किसानों की समस्याओं का कर पाएंगे।

उन्होंने बताया की इन दिनों धान की फसलों में टिलर निकलने शुरू हो चुके हैं, साथ ही कई प्रकार के रोग व कीटों का संक्रमण भी देखने को मिल रहा है। उदाहरणत: पत्ती लपेटा कीट, धान के तना बेधक कीट, सीथ ब्लाइट रोग आदि। धान के तना बेधक कीट के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा की यह गहरे पानी का कीट है। यह जलीय वातावरण में पाया जाता है। इस किट का प्रकोप वानस्पतिक चरणों से ही शुरू हो जाता है परिणाम स्वरूप पौधा आधार से आसानी से खींचा जा सकता है। इस कीट के प्रबंधन हेतु पौधों के ऊपरी भाग की पत्तियों को काट देना चाहिए जिससे अंडे नष्ट हो जाते हैं। इस कीट से बचने के लिए परपंच (१५-२०) प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार किया जा सकता है। अगर खेतों में 5 या उससे ज्यादा डेड हार्ट दिखाई दे तो रासायनिक प्रबंधन उपयोग में लाना चाहिए, जैसे कार्टपहाइड्रोक्लोराइड 50% SP नामक दवा का 2 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए या ट्राइएजोफाॅस 40% EC नामक दवा का 1 ml प्रति लीटर पानी या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC 0.5 ml प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए।

केंद्र की कृषि अभियांत्रिकी डॉ अंजलि सुधाकर ने बताया कि बदलते जलवायु में कृषि कार्यों में गति लाने के लिए कृषि यंत्रों का उपयोग अनिवार्य है। उन्होंने प्रसार कार्यकर्ताओं को कृषि में इस्तेमाल की जाने वाली जीरो टिलेज, लेजर लैंड लेवलिंग, ड्रम सीडर, पैडी ट्रांसप्लांटर आदि यंत्रों के बारे में जानकारी दी। केंद्र की गृह वैज्ञानिक पूजा कुमारी ने खरीफ में बोई जाने वाली धान, अरहर के अतिरिक्त मोटे अनाजों के चयन को लेकर किसानों को जागरूक करने की बात कही।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रसार कार्यकर्ताओं को केंद्र के विभिन्न प्रत्यक्षण इकाई जैसे, मशरूम उत्पादन, अजोला, मखाना, केंचुआ खाद, समेकित कृषि प्रणाली एवं जलवायु अनुकूल परियोजना अंतर्गत केंद्र में चल रहे दीर्घकालीन परीक्षण प्रक्षेत्र आदि को दिखाया एवं सभी इकाइयों के बारे में अवगत कराया। वही क्षेत्र परिभ्रमण के दौरान केंद्र के मत्स्य वैज्ञानिक डॉ जग पाल ने सभी प्रसार कार्यकर्ताओं को मत्स्य पालन से संबंधित अहम जानकारियां साझा की।