#MNN24X7 मैथिली न्यूज नेटवर्क शिक्षा किसी भी समाज का आधार स्तंभ होती है। एक शिक्षित समाज ही प्रगति, समानता और जागरूकता की राह पर आगे बढ़ सकता है। लेकिन तभी जब समाज का हर बच्चा शिक्षा प्राप्त करे। जब हर बच्चा स्कूल पहुँचेगा, तभी सही अर्थों में राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित, सशक्त और उज्ज्वल होगा। “हरेक बच्चा बनेगा स्कूल का हिस्सा” केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारे देश के विकास का संकल्प भी है।
शिक्षा जीवन को दिशा प्रदान करती है। यह बच्चे के व्यक्तित्व, सोच, व्यवहार और कौशल को आकार देती है।
शिक्षित बच्चा भविष्य में समाज का जिम्मेदार नागरिक बनता है। शिक्षा बच्चों को गरीबी, भेदभाव और अशिक्षा के दुष्चक्र से बाहर निकालती है। शिक्षा बच्चों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान कराती है। इसलिए, हर बच्चे का स्कूल जाना न केवल उसके व्यक्तिगत विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के विकास के लिए भी आवश्यक है।
आज भी कई बच्चे स्कूलों से दूर हैं। इसके कई कारण हैं—
1. गरीबी: कई परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्चे मजदूरी या घरेलू कार्यों में लग जाते हैं।
2. सामाजिक कुरीतियाँ: कई जगह बाल विवाह, लैंगिक भेदभाव जैसी समस्याएँ बच्चों, खासकर बेटियों, को स्कूल से दूर रखती हैं।
3. जागरूकता की कमी: अभिभावकों को शिक्षा के महत्व की जानकारी नहीं होती।
4. स्कूलों की कमी/दूरी: ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल दूर होने से बच्चे नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते।
5. सुविधाओं का अभाव: कई स्कूलों में पेयजल, शौचालय, खेलकूद और स्वच्छ वातावरण जैसी मूलभूत सुविधाएँ नहीं हैं।
‘हरेक बच्चा बने स्कूल का हिस्सा’ यह संकल्प इसलिए जरूरी है क्योंकि—
देश की प्रगति शिक्षा पर निर्भर है।
शिक्षित जनसंख्या ही रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक सुधार को बढ़ावा देती है।
अशिक्षा अपराध, हिंसा और सामाजिक बुराइयों का कारण बनती है।
हर बच्चे को समान अवसर देने के लिए शिक्षा पहली सीढ़ी है।
जब हर बच्चा स्कूल जाएगा, तभी समाज में समानता, न्याय और विकास की रोशनी पहुंचेगी।
हर बच्चे को स्कूल से जोड़ने में सरकार और समाज दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार द्वारा उठाए गए कदम:
सर्वशिक्षा अभियान
शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम
मध्याह्न भोजन योजना
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
मुफ्त यूनिफॉर्म, किताबें और छात्रवृत्ति। इन योजनाओं ने लाखों बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
परिवार और समाज की भूमिका भी इस मामले में अग्रणी है:
अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरित करना
सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाना
जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करना
शिक्षकों का सम्मान करना और स्कूलों के साथ सहयोग बनाना
अगर सरकार और समाज मिलकर काम करें, तो शिक्षा का अधिकार वास्तव में हर बच्चे तक पहुँच सकता है।
हमें क्या करना चाहिए?
हर अभिभावक को शिक्षा का महत्व समझना होगा।
बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करना होगा।
लड़का–लड़की में भेदभाव खत्म करना होगा।
स्कूली बच्चों को सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण देना होगा।
अनपढ़ परिवारों में जागरूकता अभियान चलाना होगा।
हम सब मिलकर ही इस अभियान को सफल बना सकते हैं।
आखिर में हम इतना ही कहना चाहेंगे कि “हरेक बच्चा बनेगा स्कूल का हिस्सा” एक ऐसा लक्ष्य है जो हमारे समाज को नई दिशा और नए सपने देता है। यह लक्ष्य तब ही पूरा होगा जब हम सब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। हर बच्चे के हाथ में किताब और हर बच्चे के कदम स्कूल की ओर बढ़ते हुए दिखाई दें—तभी सच्चे अर्थों में हमारा राष्ट्र प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम हर बच्चे को स्कूल से जोड़ें और उसके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करें।
यही शिक्षा, यही विकास, और यही सशक्त राष्ट्र की पहचान है।