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कहा – संस्कृत है तो संस्कृति है

दायित्वों का निर्वहन करें शिक्षक : प्रतिकुलपति

स्वतंत्रता दिवस पर संस्कृत विश्वविद्यालय में शान से लहराया तिरंगा

#MNN@24X7 दरभंगा, 77वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शहीद सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संस्कृत विश्वविद्यालय मुख्यालय में राष्ट्र ध्वज तिरंगा को फहराने के बाद कुलपति डॉ शशिनाथ झा ने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में संस्कृत के प्रति छात्रों का घटता रुझान बेहद ही चिंताजनक है। छात्र कायदे से कक्षा तक आते नहीं हैं। सरकार भी बार बार इस ओर ध्यान दिला रही है। बावजूद इसके परिदृश्य में बदलाव नहीं देखने को मिल रहा है।इसके लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। आज का दिवस शपथ दिवस है। इसलिए हमसभी का दायित्व बनता है कि कैसे अधिक से अधिक बच्चे कक्षा तक पहुंचे इस पर मनन करें। उन्होंने कहा कि संस्कृत है तो संस्कृति है। ऐसे में संस्कृत शिक्षा का प्रसार आवश्यक है।

इसीक्रम में उन्होंने योग व आयुर्वेद की चर्चा करते हुए कहा कि इससे अपने देश की प्रतिष्ठा विश्व स्तर पर है। कई ऐसी उपलब्धियां रही हैं जिससे एक समय मे भारत विश्व गुरु हुआ करता था। आज भी विज्ञान व शिक्षा के क्षेत्र में देश काफी प्रगति कर चुका है। ढेर सारे मामलों में देश आत्मनिर्भर भी हो गया है। इसलिए कर्म को प्रधानता देते हुए हमसभी देश के विकास में सतत सहायक बने रहें।

उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने बताया कि कुलपति के 15 मिनट के संस्कृत में दिए भाषण का लब्बोलुआब यह रहा कि स्वतंत्रता हमें बड़ी ही कठिनाई व बलिदानों के बाद मिली है। इसे अक्षुण्ण रखना हम सभी का कर्तव्य है। इसके लिए जिसे जो दायित्व मिला है उसे पूरा करने में कोई कोताही नही बरतनी चाहिये। साथ ही संस्कृत शिक्षा समाज व देश हित मे सर्वोपरि है।

वहीं दूसरी ओर इस अवसर पर प्रतिकुलपति डॉ सिद्धार्थ शंकर सिंह ने कहा कि हमसभी ऐसे पुरोहित हैं जो राष्ट्र को जगाता है। इसलिए स्वतंत्रता के महत्व को संजीदगी से बच्चों को बताएं। इसी क्रम में उन्होंने आगाह किया कि आज का दिवस कृतज्ञता दिवस है, आत्म चिंतन दिवस है। हम शिक्षकों को अपनी गुणवत्ता बढ़ानी होगी। साथ ही मिले दायित्वों का भी सच्चाई से निर्वहन करना होगा। हम अपनी भूमिका को समझें और उसे सकारात्मक रूप देते हुए स्व विश्लेषण करें कि हमने संस्था व बच्चों को क्या दिया।

उन्होंने कहा कि पराग कण होंगे तभी मधुमक्खियां आएंगी। यानी स्कूल-कालेजों की व्यवस्था सुधरेगी और शिक्षक अपने धर्मों का पालन करेंगे तो छात्र अवश्य ही कक्षा तक आएंगे।
इसके पूर्व विश्वविद्यालय कैम्पस में स्थापित महाराजाधिराज लक्ष्मेश्वर सिंह व सर डॉ कामेश्वर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित की गई। झंडोतोलन के मौके पर विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारी व कर्मी मौजूद थे।