Breaking News

#MNN@24X7 दरभंगा, जानकी नवमी पर विद्यापति सेवा संस्थान की ओर से स्थापित जानकी की प्रतिमा का विसर्जन शनिवार को शहर के हराही तालाब में अगले साल पुनर्आगमन की कामना के साथ किया गया। इससे पहले प्रातःकाल पुरोहित ने यजमान डा अमलेन्दु शेखर पाठक से पूजन की विधियां संपन्न करवाईं।

मौके पर उपस्थित लोगों ने माता जानकी की आरती और क्षमा प्रार्थना स्तुति में शिरकत की। सभी के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। पुरोहित ने मंत्रों के साथ कलश के जल से सभी को सिक्त किया। धरतीपुत्री, जनक नंदिनी, भूमिजा, जनकसुता, धनुषधारिणी, सीता माता आदि नामों के जयघोष के साथ मां जानकी का जयकारा लगाते हुए सभी हराही तालाब के किनारे पहुंचे। धूप-आरती के पश्चात मंत्रों के संग उनका विसर्जन किया गया। तत्पश्चात जानकी की आदमकद प्रतिमा को जलाशय में प्रवाहित किया गया।

मां जानकी की प्रतिमा को जल में प्रवाहित करते हुए सकल विश्व के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि मिथिला की यह त्रासदी रही है कि मां जानकी की तरह इसे हर मोड़ पर अग्निपरीक्षा देने को मजबूर होना पड़ता है और शासन-प्रशासन के लोग मिथिला वासी की सहनशीलता का इम्तिहान लेने से बाज नहीं आते।

जगत जननी सीता को मिथिला राज्य की धरोहर और संस्कृति का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि मिथिला की संस्कृति, गौरव, कला और मर्यादा की विश्व में अलग पहचान थी। उन्होंने मिथिला के सर्वांगीण विकास के लिए पृथक मिथिला राज्य के गठन को आवश्यक बताते हुए मां जानकी से इसके यथाशीघ्र गठन की कामना की।

इस मौके पर संस्थान के स्वागत महासचिव प्रो जीवकांत मिश्र, मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा, विनोद कुमार झा, प्रो विजय कांत झा, प्रो.चंद्रशेखर झा बूढ़ा भाई, दुर्गा नंद झा, आशीष चौधरी, मणिभूषण राजू, अरुण सिंह, नवल किशोर झा, चंद्रकांत झा, चौधरी फूलकुमार राय, पुरूषोत्तम वत्स, रामाज्ञा झा आदि उपस्थित थे।