#MNN24X7 कथा आरंभ उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर के बाहरी इलाके में स्थित श्यामनगर श्रमिक आवास कॉलोनी आम दिनों की तरह शांत थी। सुबह का वक्त था। हल्की ठंडी हवा चल रही थी और सड़क किनारे लगे पेड़ों से पत्ते झर रहे थे। लोग अपने-अपने काम पर निकलने की तैयारी कर रहे थे।
इसी बीच कॉलोनी की सफाई करने वाले दो कर्मचारी, रामसागर और मुन्ना, अपनी रोज़ की ड्यूटी पर निकले हुए थे। वे सड़क के किनारे कचरा इकट्ठा कर रहे थे कि अचानक उनकी नज़र एक बड़े से पुराने जूट के बोरे पर पड़ी, जो सड़क के किनारे झाड़ियों में आधा छिपा हुआ था।
रामसागर ने बोरे को देखते हुए कहा,
“अरे मुन्ना, ये बोरा यहाँ किसने फेंक दिया? लगता है कचरा भरा होगा।”
मुन्ना ने बोरे को थोड़ा सा हिलाया। बोरा असामान्य रूप से भारी था।
“कचरा होता तो इतना भारी नहीं होता… कहीं अंदर कोई मरा हुआ जानवर तो नहीं है?”
दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा। बोरे से हल्की सी बदबू भी आ रही थी। डर और जिज्ञासा के बीच मुन्ना ने हिम्मत करके बोरे की गांठ खोल दी।
जैसे ही बोरा खुला, दोनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
अंदर एक महिला की लाश थी।
उसके हाथ-पैर रस्सी से कसकर बंधे हुए थे और चेहरे पर चोट के निशान थे।
रामसागर घबराकर पीछे हट गया।
“हे भगवान! ये तो हत्या लगती है… जल्दी पुलिस को फोन करो!”
कुछ ही मिनटों में कॉलोनी में हड़कंप मच गया। खबर फैलते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।
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थोड़ी देर बाद कानपुर शहर की गोविंदनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस टीम की अगुवाई इंस्पेक्टर अजय त्रिपाठी कर रहे थे।
उन्होंने आसपास की जगह को घेर लिया और बोरे को ध्यान से देखा।
अजय त्रिपाठी ने अपने साथी से कहा,
“यह साफ तौर पर हत्या का मामला लग रहा है। किसी ने लाश को बोरे में भरकर यहां फेंका है।”
सबसे पहले पुलिस ने महिला की पहचान करने की कोशिश शुरू की।
करीब दो घंटे की जांच के बाद पता चला कि मरने वाली महिला का नाम सलमा बानो था। वह लगभग 55 साल की विधवा थी और उसी कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहती थी।
यह जानकारी मिलते ही पुलिस सीधे सलमा बानो के घर पहुंची।
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सलमा बानो के पति नसीम अंसारी की मौत करीब पांच साल पहले हो चुकी थी। पति के गुजर जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी सलमा पर आ गई थी।
वह अपने दो बेटों के साथ रहती थीं:
बड़ा बेटा इमरान
छोटा बेटा साजिद
इमरान की शादी तीन साल पहले रुखसार नाम की लड़की से हुई थी। रुखसार इस घर की बहू बनकर आई थी।
शुरुआत में परिवार सामान्य और खुशहाल दिखाई देता था। पड़ोसी बताते थे कि सलमा बानो मेहनती महिला थीं और अपने परिवार को संभालने की पूरी कोशिश करती थीं।
लेकिन पिछले एक साल से उनके घर से अक्सर झगड़े की आवाजें आने लगी थीं।
पड़ोसी शकील अहमद ने पुलिस से कहा,
“साहब, पहले सब ठीक था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से घर में रोज़ लड़ाई होती थी। कई बार तो आधी रात तक चिल्लाने की आवाजें आती थीं।”
इंस्पेक्टर अजय त्रिपाठी के मन में शक गहराने लगा।
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जांच के दौरान पुलिस को जो सच पता चला, उसने सभी को हैरान कर दिया।
असल में सलमा बानो का छोटा बेटा साजिद अपनी भाभी रुखसार के साथ अवैध संबंध में था।
यह रिश्ता धीरे-धीरे शुरू हुआ था।
जब रुखसार शादी के बाद पहली बार अपने मायके बरेली गई थी, उस समय साजिद भी किसी काम से वहां पहुंचा था। वहीं दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई।
धीरे-धीरे बातचीत नजदीकियों में बदल गई।
साजिद अक्सर रुखसार से कहता था,
“भाभी… आप समझती क्यों नहीं? मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ।”
रुखसार भी धीरे-धीरे इस रिश्ते में उलझती चली गई।
सूरत लौटने के बाद भी दोनों चोरी-छिपे मिलते रहे।
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एक दिन सलमा बानो ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया।
उस दिन घर में भयंकर झगड़ा हुआ।
सलमा बानो गुस्से में चिल्लाईं,
“तुम दोनों ने इस घर की इज्जत मिट्टी में मिला दी! यह रिश्ता पाप है!”
इमरान भी यह बात सुनकर हैरान रह गया।
घर का माहौल धीरे-धीरे जहरीला होता गया।
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पुलिस जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया।
रुखसार के पिता तारीक हुसैन का भी सलमा बानो से पुराना विवाद था।
बताया जाता है कि कई साल पहले जब सलमा अपने मायके गई थीं, तब तारीक हुसैन से उनकी नजदीकियां बढ़ गई थीं।
हालांकि यह रिश्ता कभी खुलकर सामने नहीं आया, लेकिन परिवार के अंदर इस बात को लेकर हमेशा तनाव बना रहा।
इंस्पेक्टर अजय त्रिपाठी ने फाइल बंद करते हुए कहा,
“यह परिवार रिश्तों के ऐसे जाल में उलझ चुका था, जहां भरोसा, सम्मान और नैतिकता सब खत्म हो चुके थे।”
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पुलिस को शक था कि यह हत्या गुस्से में नहीं बल्कि पूरी योजना के तहत की गई है।
पूछताछ में साजिद टूट गया।
उसने बताया कि सलमा बानो लगातार दोनों को अलग होने के लिए मजबूर कर रही थीं।
एक दिन साजिद ने रुखसार से कहा,
“अगर अम्मी जिंदा रहीं तो हम कभी साथ नहीं रह पाएंगे।”
धीरे-धीरे दोनों ने एक खतरनाक फैसला कर लिया।
एक रात जब सलमा बानो सो रही थीं, तब दोनों ने मिलकर उनका गला दबा दिया।
इसके बाद लाश को बोरे में भरकर देर रात कॉलोनी के बाहर फेंक दिया।
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जब सच्चाई सामने आई तो पूरी कॉलोनी सन्न रह गई।
लोग कहते थे,
“रिश्तों की ऐसी गिरावट हमने पहले कभी नहीं देखी।”
इंस्पेक्टर अजय त्रिपाठी ने दोनों को गिरफ्तार करते हुए कहा,
“अवैध रिश्ते अक्सर सिर्फ घर नहीं तोड़ते… कभी-कभी जिंदगी भी खत्म कर देते हैं।”
और इसी के साथ एक परिवार की कहानी खत्म हो गई—
एक ऐसी कहानी जिसमें मोहब्बत, लालच, विश्वासघात और अपराध सब कुछ शामिल था।
