#MNN24X7 दरभंगा। मिथिला लेखक मंच के तत्वावधान में एकल मैथिली कविता पाठ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सुबेदार नंद किशोर साहू ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. श्रीशंकर झा ने की, जबकि संचालन श्रीचन्द्रेश ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. श्रीउदय शंकर मिश्र के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि कविता समाज की कुरीतियों पर प्रहार कर सुधार का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि सत्ता के विरुद्ध सत्य कहना ही कवि का वास्तविक धर्म है, सत्ता की स्तुति करना नहीं। उन्होंने प्रसिद्ध पंक्ति — “जहां न जाएं कवि वहां जाएं रवि” — का उल्लेख करते हुए कवियों की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला।
सुबेदार नंद किशोर साहू ने सरस्वती वंदना, आजादी, भोला बाबा कऽ नचारी, बेटी, बदलल जमाना, मिथिला राज्यक पुनर्स्थापना गीत, श्रृंगार, भजन, पर्यावरण, हम सैनिक हिन्दुस्तानी छी, मधुर बसुरिया हे तथा साजन सहित कुल बारह मैथिली कविताओं का सस्वर पाठ किया। उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा।
समीक्षा करते हुए राधेश्याम पोद्दार ने कहा कि साहूजी की कविताओं में मार्मिक चित्रण एवं शब्दों का सुंदर प्रवाह है। वहीं श्री रामकुमार ने उनकी कविताओं को उच्चस्तरीय बताया।
डॉ. हीरालाल सहनी ने कहा कि कवि के काव्य विन्यास और शब्द प्रवाह ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने साहूजी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे श्रीचन्द्रेश ने कहा कि नंद किशोर साहू की कविताओं में अभिधा, लक्षणा और व्यंजना का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। उन्होंने कवि को निरंतर साहित्य साधना करते रहने की प्रेरणा दी।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. श्रीशंकर झा ने नंद किशोर साहू को मैथिली साहित्य का “अनमोल रत्न” बताते हुए कहा कि वे अपनी लेखनी की धारा से साहित्य जगत को निरंतर आलोकित करते रहें।
