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ध्वज के रंगों को आत्मसात करने की जरूरत : प्रतिकुलपति

संस्कृत विश्वविद्यालय में शान से फहरा तिरंगा

#MNN@24X7 दरभंगा, 78वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संस्कृत विश्वविद्यालय मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद सभी कर्मियों को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रो0 लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के जितने भी महापुरुष हैं वे किस तरह से संस्कृत से जुड़े हुए थे, संस्कृत से भारतीय स्वतंत्रता किस रूप में जुड़ी हुई थी, इसे आज याद करने का समय है। इसे नई पीढ़ी को बताकर भी हम अपनी स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखेंगे और प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने सभी वीर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि इनका बलिदान अविस्मरणीय है। अब शांति के साथ त्याग- समर्पण व प्रगति पर अधिक ध्यान देने की जरुरत है।

उन्होंने सन्देश देते हुए कहा कि संस्कृत जगत की ओर से भरतीय संस्कृति को अक्षुण्ण रखने के लिए, भारतीय अस्मिता का मान बढ़ाने के लिए और राष्ट्रीय ध्वज की प्रतिष्ठा को भी बरकरार रखने के लिए हमसभी हमेशा प्रयत्नशील रहें, संकल्पित रहें। उन्होंने कहा कि हमें याद रखनी होगी कि करीब 90 साल संग्राम चलने के बाद विदेशी ताकतों से हमें 1947 में स्वतंत्रता मिली थी।

वहीं, प्रतिकुलपति प्रो0 सिद्धार्थ शंकर सिंह ने कहा कि आज संकल्प का दिन है। राष्ट्र ध्वज के तीनों रंगों को आत्मसात करने का दिन है तथा समाज को बताने की जरूरत है कि आजादी की लड़ाई में भी हर जगह संस्कृत का संस्कार विद्यमान था। उन्होंने कहा कि केसरिया ऊर्जा का प्रतीक है और इससे प्रगति आती है।उजला रंग शांति का द्योतक है और जहां शांति है वहीं प्रगति है।

उन्होंने कहा कि हम संस्कृत वाले धन्य हैं कि उनका भी स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका रही थी, इसे भी आज याद करने का दिन है। इतना ही नही, ध्वज में विद्यमान चक्र भी संस्कृत शास्त्रों की ही उपज है। उन्होंने कहा कि जब पुरोहित सो जाते हैं यानी शास्त्रों से दूरी बन जाती है तो आजादी भी सो जाती है, इसे याद रखने की जरूरत है।

उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकान्त ने बताया कि झंडोत्तोलन से पूर्व कुलपति, प्रतिकुलपति का कुलसचिव प्रो0 ब्रजेश पति त्रिपाठी ने पुष्पगुच्छ से स्वागत किया और सभी ने परिसर स्थित महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह व लक्ष्मेश्वर सिंह की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि दी।

मौके पर विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारी व कर्मी के साथ साथ एनएसएस के स्वयंसेवक भी उपस्थित थे। वहीं स्नातकोत्तर विभाग में रूसा द्वारा प्रदत्त राशि से निर्मित दो भवनों का कुलपति प्रो0 पांडेय द्वारा उद्घाटन किया गया।