बोझ परहक आँटी…………. (मैथिली खिस्सा)
अप्पन सभक अस्तित्व एकदोसरक बिना संभवे नहिं अछि। जाहि ठाम रहै छी,ओतुका टोल-समाजक हिसाबे मोन मिजाज बनि जायत अछि। मुदा […]
कादम्बरी (धारावाहिक नाटक -अंतिम भाग)
दोसर भाग….…………. पाँचम दृश्य [ कलकल प्रवाहिनी यमुनाक तट।एकटा विशाल वृक्षक नीचाँ स्वामी हरिदास चिन्तामग्न बैसल छथि। सहसा तानसेन पाछू […]
कादम्बरी (मैथिली नाटक-पहिल कड़ी)
पहिल दृश्य [प्रातःकाल । स्वामी हरिदास पूजा पर बैसल छथि ।माधो सिंहक प्रवेश ।] माधो सिंह ( कातर स्वरमे )-गुरूदेव, […]