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•बुखार, सांस लेने में परेशानी, शरीर में दर्द और खांसी हैं सामान्य लक्षण।
•लक्षणों की पहचान कर त्वरित प्रबंधन एवं उपचार आवश्यक।
•बच्चों में निमोनिया से बचाव में पीसीवी टीका कारगर।

#MNN@24X7 समस्तीपुर, 27 अक्टूबर। मौसम में बदलाव तेजी से देखा जा रहा है. दिन में गर्मी और शाम ढलते ही ठण्ड का अहसास होना शुरू हो जाता है. यह समय किसी की भी सेहत को बिगाड़ने वाला होता है. ऐसे समय में कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों और उम्रदराज लोगों में निमोनिया होने की ख़बरें आम हैं।

कमजोर प्रतिरोधक प्रणाली वाले लोगों को है अधिक ख़तरा:

सिविल सर्जन डा. एसके चौधरी ने बताया निमोनिया एक संक्रामक रोग है जो सबसे पहले एक या दोनों फेफड़ों की क्षमता को प्रभावित करता है. इससे सांस लेने में तकलीफ, बुखार, शरीर में दर्द और थकावट जैसी समस्याएँ हो सकती हैं . लक्षण दिखाई देते ही तुरंत चिकित्सीय प्रबंधन जरूरी है. खासकर शिशुओं, बच्चों एवं 65 वर्ष से ऊपर आयु वाले लोगों या कमजोर प्रतिरोधक प्रणाली वाले लोगों को निमोनिया संक्रमण का अधिक ख़तरा होता है. यह एक संक्रामक रोग है जो छींकने या खांसने से फ़ैल सकता है. इस समय व्यक्तिगत स्वच्छता, नियमित दिनचर्या और उचित खान पान निमोनिया से सुरक्षा का सबसे कारगर तरीका है.

बच्चों को निमोनिया से बचाव में पीसीवी वैक्सीन कारगर:

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. विशाल कुमार ने बताया पीसीवी वैक्सीन बच्चों को निमोनिया से बचाने में सहायक होता है. इसे सरकार द्वारा नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया है. इसे तीन खुराकों में दिया जाता तथा यह बच्चों को निमोनिया से बचाने में अहम् भूमिका अदा करता है. 2 साल से कम आयु के बच्चों और 2 से 5 साल के बच्चों को अलग अलग निमोनिया के टीकों की सलाह दी जाती है.

निमोनिया छींकने या खांसने से फ़ैलने वाला संक्रामक रोग है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के शोध बताते हैं कि निमोनिया से ग्रसित होने का खतरा 5 साल से कम उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा है. दुनिया भर में होने वाली बच्चों की मौतों में 15 प्रतिशत केवल निमोनिया की वजह से होती हैं.यह रोग शिशुओं के मृत्यु के 10 प्रमुख कारणों में से एक है, जिसका कारण कुपोषण और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता भी है. निमोनिया से बच्चों के ग्रसित होने की संभावना सर्दियों के मौसम में अधिक होती है.