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पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर महिलाओं ने की वट वृक्ष की पूजा

#MNN24X7 दरभंगा। मिथिलांचल सहित पूरे उत्तर बिहार में सुहागिन महिलाओं का आस्था, समर्पण और अखंड सौभाग्य का महापर्व ‘वट सावित्री’ शुक्रवार को श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर महिलाओं ने निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखकर वट वृक्ष की विशेष पूजा-अर्चना की।

सुबह से ही जिले के मंदिर परिसरों तथा गांवों के प्राचीन बरगद वृक्षों के नीचे महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पारंपरिक परिधानों और श्रृंगार में सजी सुहागिन महिलाएं समूह बनाकर लोकगीतों और मंगल गीतों के बीच सामूहिक पूजा करती नजर आईं। पूजा स्थलों पर धार्मिक वातावरण बना रहा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार वट वृक्ष को अक्षय और अमरत्व का प्रतीक माना जाता है। विद्वानों के अनुसार इसकी जड़ में भगवान ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना गया है। इसी कारण वट वृक्ष की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। आयुर्वेद और पर्यावरण की दृष्टि से भी बरगद का वृक्ष अत्यंत उपयोगी माना गया है।

पूजा विधि के तहत महिलाओं ने प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए और व्रत का संकल्प लिया। पूजा की थाली में ऋतु फल, फूल, अक्षत, रोली, भीगा चना एवं प्रसाद सजाकर वट वृक्ष की आराधना की गई। इसके बाद महिलाओं ने बरगद के तने पर कच्चा सूत लपेटते हुए 7 अथवा 108 बार परिक्रमा की और सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण किया।

धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा के बाद महिलाएं अपने पति के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं और फिर व्रत खोलती हैं। बांस से बने पंखों से वट वृक्ष और पति को हवा देने की परंपरा भी निभाई गई, जो सेवा, समर्पण और दांपत्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

पर्व को लेकर बाजारों में भी खास रौनक देखने को मिली। पूजा सामग्री, साड़ी, श्रृंगार और पारंपरिक वस्तुओं की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ लगी रही। पूरे मिथिलांचल में वट सावित्री पर्व को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना हुआ है।

।नीरज कुमार राय की रिपोर्ट