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दरभंगा।परिवर्तन संसार का नियम है। समय पर प्रत्येक वस्तु में यथोचित नवीनता और परिवर्तन होना स्वाभाविक है। तभी उस वस्तु की उपयोगिता और प्रासंगिकता बनी रहती है। अन्यथा नवीनता के अभाव में वस्तु अनुपयोगी और निरर्थक प्रमाणित हो’ जाता। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अपनी शिक्षा नीति में सरकार परिवर्तन करती है। आज की शिक्षा जब रोजगार परक होगी तभी उस दिशा मे युवाओं का झुकाव होगा। सरकार तकनीकी शिक्षा पर जोर दे रही है।
‘द स्पौटलाइट थिएटर दरभंगा’ द्वारा आयोजित आठ दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव ‘अष्टदल’ के तीसरे दिन इसी सब बातों को ध्यान मे रखते हुए एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित किया गया जिसका विषय था ‘नई शिक्षा नीति और रंगमंच मे रोजगार का सवाल’
जिस अवसर पर अपने विचार प्रस्तुत करते डॉ.चैतन्य प्रकाश ने कहा कि जैसे समय तेजी से परिवर्तित हो रहा है वैसे ही शिक्षा नीति मे बदलाव भी आवश्यक था,अतः सरकार ने ये अच्छा कार्य किया पर अभी इसमे बहुत कुछ जोड़ा जाना बांकी है। अमर जी राय का विचार था कि रंगमंच मात्र मनोरंजन का साधन नहीं अपितु जनजागरण का माध्यम है। ब अभिनय मन बहलाने मात्र का काम नहीं करता है,अपितु अब इस क्षेत्र मे रोजगार की संभावना बनती है। नाटक के बाट होते सिनेमा, सिरियल मे रोजगार प्राप्त करने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।
दीपक सिन्हा का कहना था कि नवीन पीढी के लोग अब मात्र डिग्री हासिल करने के लिए नहीं अपितु आर्थिक विकास के लिए भी प्रयत्नशील रहते हैं। ऐसे में नई शिक्षा नीति बहुत उपयोगी साबित होगा।
डॉ.वेदप्रकाश के कथनानुसार नई शिक्षा नीति में मातृभाषा मे प्रारंभिक शिक्षा और रोजगार परक शिक्षा को प्रोत्साहन देनेका विचार अति उत्तम है।
स्नातकोत्तर संगीत एवं नाट्य विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता.अमर जी राय,
बीज भाषण चैतन्य प्रकाश और संचालन सागर सिंह ने किया। तत्पश्चात एकल नाट्य प्रस्तुति के अन्तर्गत ‘रागरंग’ और ‘अमृतसर आ गया है, की मोहक प्रस्तुति भी हुई।