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#MNN24X7 समस्तीपुर, संवाददाता, जिले में इन दिनों रसोई गैस सिलिंडर की किल्लत ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि शहर से लेकर गांव तक लोग मजबूर होकर पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेने लगे हैं। खासकर चाय दुकानदारों पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है, जहां गैस की अनुपलब्धता के कारण चाय अब लकड़ी के चूल्हे पर बनाई जा रही है।

स्थानीय बाजारों में कई उपभोक्ताओं ने बताया कि गैस एजेंसियों पर समय पर सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। बुकिंग के बावजूद कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इस वजह से घरेलू महिलाओं को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रसोई का पूरा काम प्रभावित हो गया है।

चाय दुकानदारों का कहना है कि गैस नहीं मिलने से उनका व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है। एक दुकानदार ने बताया कि “पहले गैस से जल्दी-जल्दी चाय बन जाती थी, लेकिन अब लकड़ी के चूल्हे पर समय अधिक लगता है और मेहनत भी ज्यादा करनी पड़ती है।” वहीं, लकड़ी की बढ़ती मांग के कारण इसकी कीमतों में भी इजाफा देखा जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां अधिकांश परिवार पहले से ही सीमित संसाधनों पर निर्भर हैं। गैस की किल्लत ने उनकी दिनचर्या को और कठिन बना दिया है। कई लोग मजबूरी में पुराने तरीकों की ओर लौट रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गैस आपूर्ति को सामान्य किया जाए, ताकि आम जनजीवन सुचारू रूप से चल सके।