#MNN24X7 दरभंगा /समस्तीपुर, 29 मई।ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा तथा भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी समसामयिक कृषि परामर्श में किसानों को आगामी दिनों में संभावित वर्षा को देखते हुए कृषि कार्यों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि मक्का की कटाई, दौनी एवं दानों को सुखाने का कार्य मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्वक करें। वहीं मूंग की तैयार फसल की तुड़ाई भी संभावित वर्षा को देखते हुए समय पर पूरी करने की सलाह दी गई है।
खरीफ प्याज की खेती के लिए किसानों को नर्सरी तैयार करने की सलाह दी गई है। स्वस्थ पौध उत्पादन के लिए नर्सरी में गोबर की खाद डालने तथा एक मीटर चौड़ी छोटी-छोटी उथली क्यारियां बनाने को कहा गया है। कृषि विशेषज्ञों ने खरीफ प्याज की एन-53, एग्रीफाउंड डार्क रेड, अकी कल्याण एवं भीमा सुपर किस्मों की अनुशंसा की है। बीज बोने से पहले बीजोपचार करने तथा प्रमाणित स्रोत से ही बीज खरीदने की सलाह दी गई है।
धान की खेती को लेकर भी किसानों को तैयारी शुरू करने को कहा गया है। 10 जून तक लंबी अवधि वाली धान की किस्मों का विचड़ा गिराने का उपयुक्त समय बताया गया है। राजश्री, राजेन्द्र मंसूरी, राजेन्द्र स्वेता, स्वर्णा, स्वर्णा सब-1 तथा वीपीटी-5204 जैसी किस्मों की नर्सरी लगाने की सलाह दी गई है। अच्छी पौध के लिए खेत की समुचित तैयारी और सड़ी गोबर खाद के प्रयोग पर जोर दिया गया है।
खरीफ मक्का की बुआई के लिए खेत की तैयारी करने तथा प्रति हेक्टेयर 10 से 15 टन सड़ी गोबर खाद प्रयोग करने की सलाह दी गई है। साथ ही वैज्ञानिकों ने देवकी, शक्तिमान-1, शक्तिमान-2, शक्तिमान-5, राजेन्द्र संकर मक्का-3 एवं गंगा-11 जैसी किस्मों को उत्तर बिहार के लिए उपयुक्त बताया है।
अदरक की खेती करने वाले किसानों को मरान एवं नदिया किस्मों की बुआई की सलाह दी गई है। खेत की तैयारी के दौरान गोबर खाद एवं संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर बल दिया गया है। साथ ही बीज प्रकंद को रौडोमिल दवा के 0.2 प्रतिशत घोल से उपचारित कर बुआई करने की सलाह दी गई है।
गन्ने की फसल में कालिका (स्मट) रोग के प्रकोप की संभावना जताते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सतर्क रहने को कहा है। यदि गन्ने में काले रंग की चाबुकनुमा डंठल दिखाई दे तो प्रभावित पौधों को सावधानीपूर्वक काटकर खेत से बाहर नष्ट करने की सलाह दी गई है।
पशुओं के हरे चारे के लिए किसानों को ज्वार, बाजरा एवं मक्का की बुआई करने को कहा गया है। साथ ही गेथ, लोबिया एवं राईस बीन की अंतरवर्ती खेती करने से चारे की गुणवत्ता बढ़ने तथा दुधारू पशुओं को पौष्टिक आहार मिलने की बात कही गई है।
