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#MNN24X7 , संवाददाता।, शिक्षा विभाग द्वारा ग्रीष्मावकाश के दौरान शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्णय पर विधायक सह बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री आलोक कुमार मेहता ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने इस निर्णय को शिक्षकों के अधिकारों के विपरीत बताते हुए इसे तत्काल स्थगित करने की मांग की है।

आलोक कुमार मेहता ने कहा कि ग्रीष्मावकाश शिक्षकों का वैधानिक अवकाश होता है। ऐसे समय में उन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए बुलाना उनके अधिकारों का हनन और शोषण के समान है। उन्होंने कहा कि पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान शिक्षक लगातार विद्यालयी कार्यों में व्यस्त रहते हैं और गर्मी की छुट्टियां उनके लिए परिवार के साथ समय बिताने, बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने तथा व्यक्तिगत कार्यों को पूरा करने का महत्वपूर्ण अवसर होती हैं।

उन्होंने कहा कि अवकाश अवधि में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने से शिक्षकों का यह महत्वपूर्ण समय प्रभावित होता है। यदि प्रशिक्षण कराना आवश्यक है तो उसे शैक्षणिक सत्र के दौरान अथवा छुट्टियों के अतिरिक्त किसी अन्य उपयुक्त समय पर आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

पूर्व शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि वर्तमान प्रशिक्षण कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए तथा इसे ग्रीष्मावकाश समाप्त होने के बाद आयोजित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षकों की समस्याओं और सुविधाओं का भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

मेहता ने उम्मीद जताई कि सरकार शिक्षकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करेगी और उनके हित में उचित कदम उठाएगी।