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#MNN24X7 नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की कुतुबमीनार को लगभग सभी ने देखा होगा,लेकिन क्या आपको पता है कि दिल्ली की तंग गलियों और चहल-पहल भरे बाजारों के बीच एक चोर मीनार भी खड़ी है।चोर मीनार का नाम सुनकर आपको लग रहा होगा कि यहां कभी चोर रहते होंगे,लेकिन कहानी बिल्कुल उलट और डरावनी है।चोर मीनार के पत्थर भले ही खामोश हैं,लेकिन इसकी कहानी रोंगटे खड़े कर देती है। 13वीं सदी में बनी ये चोर मीनार न सिर्फ एक वास्तुशिल्प है,बल्कि एक शासक की क्रूरता और चतुराई का प्रतीक भी है।

किसने बनवाई ये डरावनी मीनार।

दिल्ली के क्रूर शासक अलाउद्दीन खिलजी ने 1296 से 1316 के बीच ये चोर मीनार बनवाई थी।खिलजी का शासन काल अपराध और आक्रमणों से भरा था।मंगोलों की बार-बार दिल्ली पर नजरें गड़ाने और शहर में चोरी-डकैती का बोलबाला होने से परेशान होकर खिलजी ये चोर मीनार खड़ी की।इसका उद्देश्य ही बयां करता है, ये कोई साधारण मीनार नहीं थी। इसमें बने 225 छेद चोरों,कैदियों और विद्रोहियों के सिरों को प्रदर्शित करने के लिए थे।खिलजी का मकसद साफ था कि अपराधी को सजा देकर बाकी लोगों को डराना, ताकि शहर में कानून का राज कायम रहे।ये चोर मीनार खिलजी की न्याय व्यवस्था का एक हिस्सा थी, जो क्रूरता से भरी होने के बावजूद शहर को सुरक्षित रखने में कामयाब रही।

बेहद डरावना है चोर मीनार का इतिहास।

चोर मीनार की प्रसिद्धि उसके खौफनाक इतिहास से है। मध्यकाल में जहां सजाएं सार्वजनिक होती थीं,ये चोर मीनार उसका चरम उदाहरण बनी। खिलजी के समय में पकड़े गए चोरों या मंगोल आक्रमणकारियों के सिरों को इन छेदों में गाड़ दिया जाता था।आज ये विख्यात है क्योंकि ये मध्ययुगीन मनोविज्ञान को दर्शाती है कि डर से कैसे कानून लागू किया जाता है।पर्यटक चोर मीनार को टावर ऑफ थिएव्स के नाम से भी जानते है,लेकिन प्रसिद्धि के साथ एक सबक भी जुड़ा है। कैसे एक राजा ने अपराध को जड़ से उखाड़ फेंका,भले ही तरीका डरावना हो।वास्तव में ये चोर मीनार खिलजी की सैन्य रणनीति का भी हिस्सा थी,जो दिल्ली को आक्रमणों से बचाने में मददगार साबित हुई।

कहां मिलेगी ये अनदेखी धरोहर।

दिल्ली के हौज खास इलाके में अरबिंदो मार्ग के किनारे हौज खास एन्क्लेव मेट्रो स्टेशन के पास ये चोर मीनार शांतिपूर्वक खड़ी है। रबल मेसनरी (कंकड़-पत्थरों से बनी) संरचना, जो करीब 13 मीटर ऊंची है,आसानी से नजरअंदाज हो जाती है क्योंकि ये व्यस्त सड़क के किनारे बनी है,लेकिन अगर आप हौज खास गांव की ओर बढ़ें, तो ये अचानक नजर आ जाती है। ये ASI के संरक्षण में है और आसपास हौज खास कॉम्प्लेक्स की हरी-भरी वादियां इसे और रहस्यमयी बनाती हैं

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