कृषि के विकास के लिए यंत्रो का प्रयोग अपेक्षित।

दरभंगा, 18 नवम्बर-दरभंगा के लहेरियाराय अवस्थित स्थानीय नेहरू स्टेडियम (पोलो मैदान), दरभंगा में कृषि विभाग द्वारा कृषि यांत्रिकरण मेला का आयोजन किया गया।
 
मेले का उद्घाटन मंत्री समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार मदन सहनी के साथ, बेनीपुर के विधायक विनय कुमार चौधरी, हायाघाट के विधायक रामचन्द्र प्रसाद, जिलाधिकारी राजीव रौशन, जिला परिषद् अध्यक्ष रेणु देवी, उप विकास आयुक्त अमृषा बैंस के कर-कमलों से दीप प्रज्जवलन कर किया गया।
 
इस अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी संजय कुमार सिंह एवं परियोजना निदेशक (आत्मा) पुणेन्दु नाथ झा द्वारा बारी-बारी से सभी अतिथियो को पौधा देकर एवं पाग एवं चादर से सम्मानित किया गया।
 
दो दिवसीय कृषि यांत्रिकरण मेला में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित समाज कल्याण मंत्री, बिहार सरकार मदन सहनी ने संबोधित करते हुए कहा कि हम चाहे जितनी भी तरक्की कर लें,आसमान की ऊँचाईयों को छू ले, लेकिन जब तक हम अपने किसान भाईयों द्वारा उत्पादित अन्न ग्रहण नहीं करेंगे, तब तक शायद हम कोई काम नहीं कर सकेंगे, इसलिए हमारे किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं बल्कि पुजनीय भी हैं। इसलिए प्रशासन, सरकार और आमलोगों को भी उनकी फिक्र होनी चाहिए।
 
उन्होंने कहा कि कुछ दशक पहले तक कृषि लगातार घाटे का सौदा सिद्ध हो रहा था, किसानों का कृषि से मोह भंग हो गया था, लेकिन हमारी सरकार द्वारा कृषि से संबंधित महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन ने किसानों को फिर से खेती में आने को विवश किया है। यही कारण है कि धान,मक्का और सब्जी उत्पादन में हमारे प्रदेश ने अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है।
 
उन्होंने कहा कि एक समय में हमारे यहाँ बड़े पैमाने पर मक्का उत्पादन होता था। खासकर मिथिलांचल क्षेत्र में, लेकिन आज बहुत कम क्षेत्र में मक्का का उत्पादन होता है। सरकार भी चाहती है कि मौसम और फसल अनुकूल खेती हो। जिस जिला में जिस फसल का उत्पादन बेहतर हो सकता है, उस जिला में उसी फसल का उत्पादन किया जाए, ताकि ज्यादा फसल उत्पादन हो सके तथा किसान भाईयों को भी इसका लाभ मिलें।
 
उन्होंने कहा कि कई जिला जिनमें सहरसा, मधेपुरा, पूर्णियाँ, कटिहार, भागलपुर शामिल है, में मक्का का उत्पादन होता है तथा दरभंगा में धान, गेहूँ का फसल तथा लिची और आम जैसे फल का भी अच्छा उत्पादन होता है।
 
उन्होंने कहा कि यहाँ मछली के अलावा विश्व प्रसिद्ध माखाना का कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत उत्पादन  मिथिलांचल क्षेत्र में होता है, इसलिए मुख्यमंत्री और कृषि विभाग ने यह निर्णय लिया है, जो जिला जिस फसल का उत्पादन ज्यादा करता हो, वही फसल उस जिला में उत्पादन किया जाए, इसलिए मखाना के लिए दरभंगा जिला को चयनित किया गया है।
  
उन्होंने कहा किपिछले वर्ष उड़ान योजना के अन्तर्गत इग्लैंड एवं कई अन्य देश में लिच्ची एवं आम को दरभंगा से भेजा गया। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी ने बताया है कि वे मखाना भी विदेश भेजने वाले हैं। यह स्वागत योग्य कदम है।
 
सरकार किसान भाईयों के लिए बहुत सारी योजनाएँ चला रही है, इसके लाभ उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक समय था, जब किसान फसल उगाते थे, तो क्षति होने पर उन्हें खुद सहना पड़ता था, लेकिन अब उसकी जिम्मेवारी सरकार ले ली है।
 
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री फसल क्षति की स्वंय समीक्षा करते हैं। बाढ़, सुखाड़, आंधी तुफान, ओला, वृष्टि या कीट के आक्रमण से हुई फसल क्षति का आकलन कर उसी अनुपात में किसानों को मुआवजा उपलब्ध करया जाता है।
 
मुख्यमंत्री के किसानों के प्रति जो सोच है, वही कारण है कि आज किसान खेतों में काम कर रहे हैं और सरकार उनकी उत्पादकता बढ़ाने के विभिन्न उपाय कर रही है। उन्होंने कहा कि यहाँ मक्का की उत्पादकता अमेरिका से भी अधिक है।
 
उन्होंने कहा कि उपरोक्त 06 जिलों में  50 क्विंटल प्रति एकड़ मक्का का उत्पादन होता है, जो अमेरिका से भी ज्यादा है। शाहाबाद को धान का कटोरा कहा जाता है।
 
उन्होंने कहा कि आज बिहार में हर फसल का अच्छा उत्पादन हो रहा है और यह सरकार के प्रयास का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि यंत्र के माध्यम से हम जल्द से जल्द और अधिक से अधिक उत्पादन कर सकते हैं।
 
उन्होंने कहा कि हम जानते हैं आप मेहनती हैं, लेकिन समय बदल रहा है और बदलते समय के अनुसार कृषि यंत्रों का प्रयोग जरूरी है। जिस रफ्तार से जनसंख्या बढ़ रही है, उसी अनुपात में हमें कृषि उत्पादन क्षमता बढ़ानी होगी। यदपि पहले से कई गुणा कृषि उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी हुई है।मुख्यमंत्री जी का भी सोच है, जब तक देश के हर कोने में, उनकी थाली में बिहार के एक फसल का व्यंजन नहीं होगा, तब तक हम चैन से बैठने वाले नहीं है और यही कारण है कि हमलोग आगे बढ़ रहे हैं।
 
उन्होंने कहा कि जब हमारे किसान भाईयों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, तब ही हमारे राज्य और देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगा और इसलिए हम भी किसान भाईयों के आय के श्रोत बढ़ाने में लगे हुए हैं।
 
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए बेनीपुर के विधायक विनय चौधरी ने कहा कि वे खुद किसान परिवार से आते हैं और पहले की कृषि की तुलना में अब कृषि आधुनिक एवं यंत्र युक्त हो गई है।
 
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री, बिहार नीतीश कुमार की सोच के केन्द्रबिन्दु किसान और कृषि रहा है, जब वे केन्द्रीय कृषि मंत्री थे, तभी से किसानों के लिए कई अभूतपूर्व कार्य किये। उन्होंने ही कृषि रोड मैप का निर्माण किया।
 
कृषि रोड़ मैप बनने के कारण ही कृषि क्षेत्र में नए-नए सुधार एवं प्रयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अपनी योजनाओं की जानकारी विज्ञापन एवं होर्डिग्स के माध्यम से दी जा रही है, किसान भाइयों को उसे पढ़ने की जरूरत है।
 
उन्होंने कहा कि कृषि के विकास के लिए सरकार द्वारा2 चलायी जा रही योजनाएं व कृषि में नूतन वैज्ञानिक प्रयोग की जानकारी देने हेतु हर पंचायत में

किसान चौपाल लगाया जा रहा है। किसानों को उसमें भाग लेने एवं गंभीरता से सुनने की जरूरत है।

चौपाल में किसान से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी जाती है। नए-नए कृषि यंत्र के आ जाने से महीनों में की जाने वाली फसल दौनी अब एक से दो दिन में हो जाता है और सरकार इन यंत्रों को अनुदान पर उपलब्ध करा रही है, किसान इसका लाभ उठाएं।
 
हायाघाट के विधायक रामचन्द्र प्रसाद ने कहा कि हमारे किसानों को कोई परेशानी नहीं हो, यह कार्य कृषि विभाग को किसाने के सामंजस्य से करनी चाहिए। उन्होंने अपने विधान सभा क्षेत्र के पेयजल समस्या से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि कृषि यांत्रिकरण मेला से निश्चित रूप से किसानों को लाभ मिलेगा।
 
इस अवसर पर जिलाधिकारी, दरभंगा राजीव रौशन ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि ये किसान ही हैं, जो धरती का सीना चीर कर अन्न उपजाते हैं, जिससे लोगों को अनाज मिलता है और उनका पेट भरता है। खेती बहुत मेहनत का काम है और किसान श्रम नहीं करें, तो देश का अन्य विकास भी बेमानी माना जाएगा, क्योंकि मानव की पहली प्राथमिका अपना पेट भरना होता है, कोई भी इंसान भूखे पेट कोई तरक्की नहीं कर सकता है।
 
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कृषि के क्षेत्र में सरकार ने बहुत से आयाम स्थापित किये, बहुत तरक्की की। बहुत सारे मील के पत्थर को हमने छुआ है।
 
उन्होंने कहा कि जब भारत आजाद हुआ था, तो हम
अन्न के मामले में आत्मनिर्भर नहीं थे। हमें दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ा था, लेकिन आज 75 वर्षों के बाद भारत के किसान, राज्य के किसान व मिथिला के किसानों ने पूरी तस्वीर बदल दी है, जहाँ हम दुनिया से अनाज लेकर खाते थे, अब हम दुनिया को अनाज देकर उन्हें खिलाते हैं और आज भारत में अनाज का सरप्लस उत्पादन होता है, अब हम अनाज निर्यात करने में सक्षम हैं और निर्यात में भी दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। इसके लिए हमारे किसानों ने श्रम किया और कृषि वैज्ञानिकों व सरकार ने प्रयास किये हैं।
 
उन्होंने कृषि यांत्रिकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व में हल और बैल से खेती की जाती थी,जिससे  किसान की क्षमता सिमित था, इसलिए उत्पादन भी भूमि की क्षमता के अनुकूल नहीं हो पता था, लेकिन अब कृषि यंत्र का प्रयोग होने के कारण कृषि उत्पादन पूरी क्षमता के साथ किया जा रहा है।
 
किसानों की क्रय क्षमता सिमित है, सरकार ने इसे महसूस किया और इसके लिए सरकार ने कृषि यंत्र उत्पादकों और किसानों को मदद उपलब्ध कराने के लिए अधिक से अधिक अनुदान उपलब्ध करा रही है।
 
उन्होंने कहा कि यहाँ 90 प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है और सिर्फ दरभंगा के लिए 03 करोड़ 94 लाख रूपये अनुदान की राशि आवंटित की गयी है। उन्होंने कहा कि किसान आगे बढ़कर इसका लाभ उठावें।
  
उन्होंने कहा कि अब हमें कृषियंत्र बैंक की स्थापना पर बल देना चाहिए,ताकि ग्राम स्तर पर एक समूह स्तर पर बड़े कृषि यंत्र रखा जाए । जीविका के माध्यम से इसे क्रियान्वित कराया जा सकता है, इससे एक यंत्र से कई लोगों को खेती में लाभ प्राप्त होगा।
 
उन्होंने कहा कि आने वाला समय कृषि के लिए युगान्तकारी परिवर्तन का समय होगा। अब ड्रोन के माध्यम से उर्वरक, बीज, कीट नाशक का छिड़काव किया जाएगा।
     
उन्होंने कहा कि इस कृषि मेले में विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्र का प्रर्दशन किया जा रहा है। जिसे देखकर किसानों की समझ में वृद्धि होगी और जब ये किसान अपने गाँव में इनकी चर्चा करेंगे, तो बहुत सारे लोग जान पाएगें कि इस तरह के नए-नए कृषि यंत्र का प्रयोग किया जा सकता है।
 
उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाए रखने के लिए भी सरकार चितिंत है और इसके लिए जल-जीवन-हरियाली अभियान की शुरूआत बिहार सरकार द्वारा की गयी है और यह अभियान सभी राजनैतिक दलों की सर्वसम्मति से प्रारंभ किया गया है। जिसके अन्तर्गत जल श्रोतों, जल के प्राकृतिक संसाधन, कुँआ, पोखर, तालाब, आहर, पईन का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जिसके कारण जल संचयन क्षमता में विस्तार होगा और इसका फायदा भी कृषकों को मिलेगा, मिट्टी में उर्वरा शक्ति बढ़ंगी।
    
उन्होंने कहा कि पराली जलाने से भी पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरा शक्ति को क्षति हो रही है।
    
उन्होंने कहा कि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया दुनिया की चमत्कारी प्रक्रिया में से एक है, जिसमें पेड़-पौधे प्रदूषित वायु, कार्बन डाइऑक्साइड को सोखते है एवं उसे कार्बन में परिवत्तित कर मिट्टी को उपलब्ध कराते है, अगर ये प्रक्रिया नहीं होती तो, हमें ऑक्सीजन नहीं मिलती।
      
प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया के कारण ही हमें जीवनदायी ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में मिलता है। इस प्रकार एक तरफ मिट्टी को कार्बन मिलने पर उसकी उर्वरा शक्ति बढ़ती है और दुसरी और हमे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलता है। इसलिए हमें अधिक से अधिक संख्या में पेड़-पौधे लगाने होंगे और हमें ऑर्गेनिक फार्मिंग की ओर आगे बढ़ने की जरूरत है, ताकि हम अपने फसल अवशेष को आसानी से कम्पोस्ट में बदले दें, ताकि किसानों को उसे जलाने की जरूरत ही न पड़े। हमें इस दिशा में सोचने की जरूरत है, कृषि वैज्ञानिकों को इस दिशा में काम करने की जरूरत है।
  
इस अवसर पर कृषक संजय कुमार प्रसाद, सियाराम सिंह, कैलाश यादव एवं राजीव यादव को कृषि यंत्र क्रय करने हेतु अनुदान की स्वीकृति पत्र मंत्री महोदय एवं उपस्थित अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया।
   
कृषि यंत्रीकरण मेला का उद्घाटन मंत्री समाज कल्याण विभाग के कर कमलों सभी माननीय के सहयोग से फीता काटकर किया गया तथा उनके साथ कृषि मेला में लगे हुए स्टॉल तथा कृषि यंत्रों का बारीकी से अवलोकन किया गया।
 
इस अवसर पर उप निदेशक, जन सम्पर्क नागेन्द्र कुमार गुप्ता, जिला पंचायती राज पदाधिकारी आलोक राज, सहायक निदेशक (उद्यान) आभा कुमारी, जिला योजना पदाधिकारी नवीन कुमार एवं अन्य संबंधित पदाधिकारीगण उपस्थित थे।