#MNN24X7 दरभंगा, 21 अप्रैल, परशुराम जयंती के अवसर पर दिए गए एक बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। दलित शोषण मुक्ति मंच (DSMM) के राज्य महासचिव श्याम भारती ने भाजपा नेता एवं ब्राह्मण फेडरेशन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदय शंकर चौधरी के उस बयान की कड़ी निंदा की है, जिसमें उन्होंने एससी-एसटी एक्ट और यूजीसी नियम को ‘देश विरोधी’ बताते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की थी।
श्याम भारती ने इसे दलित-आदिवासी विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह बयान समाज में विभाजन और भेदभाव को बढ़ावा देने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को ईडब्ल्यूएस के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, तब सामाजिक समरसता की बात नहीं उठाई गई, लेकिन दलित और आदिवासी समुदाय के अधिकारों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एससी-एसटी समुदाय आज भी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर चुनौतियों का सामना कर रहा है और आरक्षण उनका संवैधानिक अधिकार है, न कि कोई दया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू किए जा रहे यूजीसी नियम से जातिगत भेदभाव पर अंकुश लगेगा, इसी कारण कुछ वर्ग इसका विरोध कर रहे हैं।
DSMM नेता ने भाजपा-जदयू के दलित जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने समाज के हितों की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरक्षण या संविधान के प्रावधानों के साथ छेड़छाड़ की गई, तो इसका व्यापक विरोध किया जाएगा।
श्याम भारती ने राज्य में दलितों पर बढ़ते अत्याचारों पर चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा सरकार इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है। उन्होंने निजी क्षेत्र में भी एससी-एसटी और अति पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू करने की मांग दोहराई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान और आरक्षण व्यवस्था पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।
